#Lockdown: हम कितने दूर थे, अब पास आ गए हैं

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हम कितने दूर थे, अब पास आ गए हैं। यह बात अटपटा लग रहा होगा, लगना लाज़मी भी है। लॉकडाउन में तो लोग एक दूसरे से दूर हो गए हैं, मिल नहीं पा रहे हैं, फिर पास कैसे? आपने यह गाना तो सुना ही होगा

“दूरियां नजदीकियां बन गयी, अजब इत्तिफ़ाक़ है”

कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला है हमारे और पर्यावरण के बीच। जिंदगी की आपाधापी में हम इतने आगे निकल गए थे कि प्रकृति और स्वच्छ पर्यावरण की तलाश में हमें कुछ दिन की छुट्टियाँ ले कर उन्हें ढूँढने जाना पड़ता था। हम गाँव से दूर हुए, हम प्रकृति से दूर हुए, हम शुद्ध हवा और पानी से दूर हो गए। बस आधुनिकता की इस होड़ में नजदीक हुए तो अपनी व्यस्त जिंदगी से, फैशन से, अनचाहे फरमाइशों से, उन आधुनिक घरों और दफ्तरों से जहां सूर्य की रोशनी भी नहीं देख सकते, उन आराम के संसाधनों से। लेकिन लॉकडाउन ने उन्ही दूरियों को नजदीकियों में बदल दिया। आए दिन जहां हम कोरोना की खबरों से परेशान हैं, जहां अर्थव्यवस्था और नौकरियों को ले कर चिंतित हैं वहीं सारे नकरात्मक खबरों के बीच मुस्कुराते, टिमटिमाते एक खबर अखबारों या डिजिटल दुनिया में एक प्यारा सा एहसास दे जा रहा है, वो है पर्यावरण से जुड़ी खबरें। ऐसी ही कुछ मुस्कुराहट भरी खबरों को यहाँ आज महसूस करेंगे।

जालंधर: हिमाचल के धौलाधार रेंज की दिखने लगी बर्फीली चोटियां

हिमाचल प्रदेश में हिमालय पर्वत की धौलाधार रेंज के पहाड़ जालंधर से दिखाई दे रहे हैं। जालंधर आमतौर पर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। हवा में दूर हुए प्रदूषण के चलते यह पर्वत श्रृंखला जालंधर के लोगों को अपने घरों से ही दिखने लगी है। स्थानीय लोग बेहद उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। साथ ही वरिष्ठ जनों का कहना है कि उन्होंने एक पीढ़ी बाद ऐसा अद्भुत नजारा देखा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सहारनपुर: हो रहे हिमालय के बर्फ वाले पहाड़ों के दर्शन

लॉकडाउन से प्रदूषण में भारी कमी दर्ज होते ही प्रकृति के विविध रंग दिखने लगे हैं। सहारनपुर से हिमालय की पहाड़ियां भी नजर आने लगी हैं। इन पहाड़ियों को कोई इन्हें मंसूरी की पहाड़ियां बता रहा है, तो कोई गंगोत्री और यमुनोत्री के पहाड़।

 

बरेली: दिखने लगी नैनीताल की पहाड़ियां

प्रदूषण में कमी का असर है कि बरेली से नैनीताल की पहाड़ियाँ दिखने लगी है। यहाँ से नैनीताल करीब 85 किमी दूर है। लोकल लोगों का कहना है कि ऐसा नजारा 20 साल बाद देखने को मिला है।

 

नासा ने जारी की तस्वीरें: 20 वर्षों में मिली भारत को सबसे साफ हवा

लॉकडाउन के कारण देश प्रदूषण मुक्त हो रहा है इसकी पुष्टि नासा ने भी की है। नासा की अर्थ ऑब्जरवेटरी ने पिछले चार सालों की तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें ये बताया है कि कैसे प्रदूषण का स्तर पूरे देश में कम हो गया है. लॉकडाउन के चलते वाहनों की आवाजाही ना के बराबर है. ज्यादातर फैक्ट्रियां बंद हैं। लोग घरों से बाहर जरूरी काम के लिए ही निकल रहे हैं। गंगा के किनारे बसा हुआ देश का हिस्सा पूरी तरह से साफ हो गया है. गंगा के किनारे बसे शहरों के ऊपर 20 साल से जो धुंधला आसमान दिखता था, जो एयरोसोल के घने बादल दिखते थे, आज वो लॉकडाउन की वजह से साफ हो गए हैं। हवा ही नहीं, जमीन, पानी सब साफ हो गया है।

 

दिल्ली को मिली साफ हवा की संजीवनी, यमुना भी हुई साफ

प्रदूषण के श्रोत बंद हैं और पहली बार दिल्ली की हवा इतनी साफ हुई है। यमुना का पानी भी करीब 75% तक साफ हो गया है। एक तरफ कोरोना एक अभिशाप की तरह पीछा कर रहा है वही दूसरी ओर लॉकडाउन पर्यावरण के लिए वरदान साबित हुआ है

लॉकडाउन ने कानपुर से वाराणसी तक साफ कर दिया गंगा का पानी

वाराणसी और कानपुर जैसे शहरों में गंगा नदी भी काफी स्वच्छ हो गई है. गंगा नदी की धारा में ऑक्सीजन का स्तर उल्लेखनीय ढंग से बढ़ गया है और पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है. अब यह पानी नहाने के लायक है.  कानपुर में भी गंगा पिछले कुछ दिनों में साफ हो गई है.    

 

 

 

 

 

 


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