उज्ज्वला योजना से कम हुई सांस की बीमारियाँ – इंडियन चेस्ट सोसाइटी

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के द्वारा किये गए रिसर्च के मुताबिक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने रसोई में काम करने वाली महिलाओं और उनके साथ रहने वाले पाँच साल के बच्चों की सेहत में महत्वपूर्ण सुधार आया है| दो साल तक, 2.05 लाख मरीजों के ऊपर किये गए रिसर्च में ये बात सामने आई कि जिन घरों की रसोई में उज्ज्वला योजना की एलपीजी पहुंची है, उन घरों में रहने वाले लोगों में सांस और फेफड़े से सम्बंधित बीमारियाँ 20 फ़ीसदी तक कम हुई है|

इस सर्वे में इंडियन चेस्ट सोसाइटी के अलावा, चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन और कई फेफड़ा रोग विशेषज्ञों का भी योगदान था| डॉ. संदीप साल्वी (निदेशक – चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन, उपाध्यक्ष – इंडियन चेस्ट सोसाइटी) के अनुसार वर्ष 2016 से 13500 चिकित्सकों ने ओपीडी में आये मरीजों के ऊपर ये रिसर्च किया गया| रिसर्च का दायरा करीब 880 शहर और कस्बे थे|

रिसर्च के मुताबिक कुकिंग गैस का प्रयोग करने वाले घरों में महिलाओं व बच्चों में सांस रोग घटा| वहीँ दूसरी तरफ जहां कुकिंग गैस नहीं है, वैसे घरों में श्वांस रोगी ढाई गुना अधिक पाए गए|

क्या फर्क पड़ा उज्ज्वला से?

1 मई, 2016 को शुरू की गयी उज्ज्वला योजना का लक्ष्य था, गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों तक एलपीजी गैस पहुँचाना| प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य था स्वास्थ्य सम्बन्धी सुधारों में धरातल से शुरुआत, रसोई में काम करनेवाली महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार, और पर्यावरण को हो रहे नुकसान से बचाव|

निस्संदेह इस योजना ने BPL परिवारों के जीवन स्तर में सुधार तो किया ही, साथ ही लाभार्थी परिवारों के सेहत पर भी इसके दूरगामी प्रभाव हुए|

उल्लेखनीय है की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत अब तक देश के 714 जिलों में 7,19,30,811 रसोई गैस कनेक्शन बांटे जा चुके हैं| साथ ही लोगों को रसोई गैस के उपयोग में होने वाली समस्याओं और सुरक्षा निदेशों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन (1906) भी शुरू की गयी है|