नई खूबी के साथ ब्रह्मोस का अगले सप्ताह परीक्षण

बालाकोट जैसी एयर स्‍ट्राइक को बिना दुश्‍मन की सीमा पार किए अंजाम दिया जा सकता है|

भारत एक बार फिर से अपनी ताकत बढ़ाने और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक अहम कदम बढ़ाने जा रहा है| दरअसल, इंडियन एयरफोर्स और डीआरडीओ ब्रह्मोस मिसाइल के हवा से छोड़े जाने वाले संस्करण का परीक्षण करने जा रहा है| ये परीक्षण अगले सप्ताह हो सकता है| परीक्षण में सफलता मिलने के बाद ही भारतीय वायुसेना की क्षमता में पहले से अधिक इजाफा हो जाएगा और भारत एक बार फिर से बालाकोट जैसे हमले को अंजाम देकर दुश्मन का मात दे सकेगा|

वायुसेना के सूत्रों के मुताबिक, इस 290 किलोमीटर मारक क्षमता वाली मिसाइल से जमीन पर लक्ष्य भेदने के विकास में तेजी लाने के लिए बेहद उत्सुक हैं। सूत्रों ने कहा, इस मिसाइल का इस्तेमाल बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक करने के लिए किया जा सकता है, जिसमें इस बार भारतीय विमानों को लक्ष्य भेदने के लिए दुश्मन की सीमा में घुसने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सूत्रों ने कहा कि इस मिसाइल के हवा से छोड़े जाने वाले संस्करण का अगले सप्ताह देश के दक्षिण हिस्से में किया जाएगा, जिससे एसयू-30 लड़ाकू विमान के साथ इस मिसाइल का समन्वय भी साबित हो जाएगा।

बता दें कि वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान की सीमा में बेहद अंदर तक घुसकर बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर एयर स्ट्राइक की थी। इसमें वायुसेना ने मिराज-2000 लड़ाकू विमान से स्पाइस-2000 बमों का इस्तेमाल मदरसे में चल रहे शिविर को ध्वस्त करने के लिए किया था।

सीमा में 150 किमी अंदर से ही बालाकोट जैसा हमला

ब्रह्मोस मिसाइल को सुखोई विमान से छोड़ने का परीक्षण सफल होते ही भारतीय वायुसेना एक नई मजबूती हासिल कर लेगी। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद वायुसेना देश की सीमा में 150 किलोमीटर अंदर से भी मिसाइल दागकर बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक कर सकेगी। ब्रह्मोस मिसाइल को हवा से छोड़ने का पहला परीक्षण जुलाई, 2018 में बंगाल की खाड़ी के ऊपर किया गया था। तब भी इसे एसयू-30एमकेआई विमान से ही फायर किया गया था।

भारत सरकार के एक अधिकारी ने बताया, “वायुसेना की लगातार बदलती जरूरतें, वो भी ऐसे वक्त में जब हम दोतरफा युद्ध को नकार नहीं सकते हैं, ये बेहद अहम प्रोजेक्ट है|” बता दें कि अबतक वायुसेना के पास मौजूद सुखोई-30 एमकेआई फाइटर विमानों में से मात्र दो को ही इस तरह तैयार किया जा सका है कि वे 2.5 टन के सुपरसोनिक एयर-टू सरफेस क्रूज मिसाइल को दाग सकें| ब्रह्मोस-ए के आकार और वजह की वजह से एक सुखोई-एमकेआई एक ही मिसाइल अपने ट्रांसपोर्ट लॉन्च कैनिस्टर में ले जा सकता है|

अगले सप्ताह होने वाले इस परीक्षण के लिए भारतीय वायुसेना और डीआरडीओ ने तैयारियां पूरी कर ली हैं| परीक्षण के दौरान इस मिसाइल को रूस निर्मित सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान से छोड़ा जाएगा| बता दें कि डीआरडीओ ने ब्रह्मोस के इस संस्करण को पूरी तरह स्वदेशी तरीके से विकसित किया है|