GST रिटर्न नहीं भर पाने वाले छोटे कारोबारियों को मिली बड़ी राहत

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कोरोना संकट के बीच आर्थिक गति को तेज करने के लिए सरकार लगातार एक के बाद एक कदम उठा रही है। इसके चलते आत्मिर्भर भारत बनाने  के लिये 20 लाख करोड़ रूपये के महापैकेज का ऐलान किया तो अब छोटे छोटे सुधार करके देश के कारोबारियों को ये ध्यान दिलाने में लगी है कि इस स्थिति से निकलने के लिए मोदी सरकार उनके साथ है इस क्रम में सरकार ने कोरबारियों पर लगने वाले GST टैक्स पर कई तरह की राहत देने का ऐलान किया।

18% से घटकर 9% हुई ब्याज दर

कोविड-19 महामारी से पहले तक की समय  में जीएसटी रिटर्न फाइन नहीं कर पाने वालों को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक खत्म होते बताया कि  जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक की अवधि में जिन्होंने जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं किया है और जिन पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, उन्हें अब रिटर्न फाइल करने पर कोई लेट फीस नहीं देनी होगी। वही 5 करोड़ रुपये के कुल टर्नओवर वाले छोटे करदाता जो फरवरी, मार्च और अप्रैल 2020 के जीएसटी रिटर्न्स 6 जुलाई तक नहीं भरेंगे, उन्हें सालाना 9% ब्याज दर के साथ सितंबर तक रिटर्न भरने की छूट होगी। पहले बकाया टैक्स पर सालाना ब्याज दर 18% तय थी। ऐसे टैक्सपेयर्स को उस हालत में लेट फीस और ब्याज नहीं भरना होगा जो इस वर्ष मई, जून और जुलाई के महीनों में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सितंबर तक जीएसटीआर- 3B का भर भरके भेजेगे।

45 फीसद जीएसटी का हुआ संग्रह

परिषद ने इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर किसी भी तरह के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि शुक्रवार की बैठक में जीएसटी दर में कटौती को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।सीतारमण ने कहा कि पिछले दो महीनों में अन्य महीनों की तुलना में 45 फीसद जीएसटी का संग्रह हुआ। उल्लेखनीय है कि कम संग्रह और रिटर्न दाखिल करने की विस्तारित समय सीमा के साथ, सरकार ने अप्रैल और मई के महीनों के लिए मासिक जीएसटी राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। मौजूदा समय में जीएसटी संरचना के तहत, 5, 12, 18 और 28 फीसद स्लैब के तहत कर लगाया जाता है। उच्चतम कर स्लैब के ऊपर, लक्जरी, और डीमेरिट गुड्स पर उपकर लगाया जाता है और उसी से प्राप्त आय का उपयोग राज्यों को किसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए किया जाता है।

कुलमिलाकर कहा जाये तो इस बैठक में भी कारोबारियों को राहत देने का ही काम किया गया है। जैसे कोरोना संकट के दौरन सरकार लगातार कर रही है। वैसे सरकार के इश कदम से सबसे अच्छी बात ये होगी कि मंहगाई तेजी के साथ नही बढ़ेगी जिसका सीधा फायदा देश के मध्यमवर्ग पर पड़ेगा। साथ ही कारोबार को नगदी की कमी से भी नही झूजना पड़ेगा जिसके चलते थम गये कारोबार को स्पीड मिल पायेगी। ऐसे में आशा यही की जा सकती है कि आने वाले दिनो में सरकार के इस फैसलो से भारतीय इकोनॉमी एक बार फिर से बूम करेगी। और देश तेजी के साथ आगे बढ़ेगा।


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