चुनाव के जरिये देशवासी बनेगें भारत भाग्य विधाता

लोकतन्त्र का महापर्व यानी की लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। और इस बार इस महापर्व मे देश के 90 करोड़ लोग हिस्सा लेगें यानी की यूरोप की जितनी आबादी है उससे कही ज्यादा लोग अपनी सरकार चुनेगें.

कहा जाता है कि लोकतंत्र का रूप ही निराला होता है और ये सिर्फ चुनाव के वक्त ही देखने को मिलता है। हर पार्टी अपने आपको सत्ता मे काबिज करने के लिये जनता जनार्दन के दिल को जीतने के लिए लग जाती है। नये नये नारे गढ़े जाते है महा रैलियों के दौर शुरू हो जाते है. मजे की बात तो ये है कि चुनावी मौसम मे हमारे देश के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक मे एक अलग सा जोश देखने को मिलता है। अरे देश की आधी आबादी महिलाओं की तो हमने अभी बात ही नही की, लेकिन आप ध्यान जरूर दे कि लोकतन्त्र के इस महायज्ञ मे उनकी भूमिका भी मर्दो से कम नही है। आज भारत की नारी चुनाव को लेकर पूरी तरह से सजग है और वो किसी के कहने पर वोटिंग नही करती बल्कि अपने मत का अधिकार सोच समझकर निर्भीक होकर करती है।

90 करोड़ मतदाता इस बार करेगें मतदान-

इस महायज्ञ को पूरी तरह से सफल बनाने के लिये चुनाव आयोग ने तैयारी भी कर ली है। इस बार 7 चरण मे मतदान करवाया जायेगा जो 11 अप्रैल से 19 मई चक चलेगा। इसके साथ साथ इस बार 10 लाख पोलिंग स्टेशन बनवाये जायेगें। जो पिछली बार से 1 लाख ज्यादा है। वही 90 लाख लोगों वोट डालेगें अगर एक तरह से देखा जाये तो यूरोप से ज्यादा आबादी अपनी सरकार को चुनेगी। शायद इसी लिये भारत मे होने वाले चुनाव को देखने समूचे विश्व से लोग आते हैऔर इसकी व्यवस्था के मुरीद हो जाते है।

21वींसदी मे जन्में करगें पहली बार वोटिंग-

17वी लोकसभा को चुनने मे इस बार पहली बार 21वींसदी मे पैदा होने वाले बच्चे भी वोटिंग करेगें। अगर इनकी आबादी की बात करे तो करीब ऐसे 1.5 करोड़ वोटर पहली बार वोट करेगें जो 18 से 19 साल के होगें। यानी की देश की वो आबादी जो युवा है जिसकी सोच युवा है और जो कल के भारत की पठकथा लिखने मे माहिर भी है, वो अच्छी तरह से ये भी जानती है कि देश के लिए कौन सही है और कौन गलत ।

यानी चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, सियासी दांव-पेंच भी इस पूरे एक महीने देखने को मिलेगा लेकिन भारत का कल किसके हाथ ये तो 23 मई को पता चलेगा, यानी की सभी को अभी से बस ब्रेसबी से इंताजार है। चलिये देखते है कि इस बार भारतवासी किसके साथ खड़े होते है।