विपक्ष की इवेंट मैनेजमेंट वाली पॉलिटिक्स  से हो जाइये सावधान

देश का विपक्ष आज कल विपक्ष की भूमिका में कम बल्कि इवेंट मैनेजमेंट वाली पॉलिटिक्स करने में ज्यादा लगा हुआ है हम इसलिये ऐसा बोल रहे है क्योंकि जब से संसद का सत्र शुरू हुआ है वहां पर वो हंगामा खड़ा करके बाहर निकल जाता है और फिर देश की सड़क में मोदी सरकार पर हमला करने के लिये प्रदर्शन नहीं बल्कि इवेंट करते हुए दिखाई देता है। आप सोच रहे होंगे कैसे तो चलिये आपको समझाते हैं।

विपक्ष की इवेंट मैनेजमेंट वाली पॉलिटिक्स

इस इवेंट मैनेजमेंट वाली पॉलिटिक्स को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि विपक्ष पहले एक महंगे से होटल में चाय नाश्ता उड़ाता है और फिर वहां से साइकिल के जरिये निकल कर महंगाई का रोना रोकर आम जनता को ये बताने की कोशिश करता है कि उन्हें ही आपकी फ्रिक है। ऐसा करने के लिये वो सस्ती साइकिल पर चढ़कर संसद तक जा कर ये दिखाता है हालांकि हकीकत में अगर गौर करे तो इससे पहले इन्हीं विपक्ष के नेताओं की फोटो एक से एक मंहगी साइकिल चलाते हुए देखी जा सकती है। मतलब एक इंवेट की तरह ये साइकिल किराये में ली गई। ठीक उससे दूसरे दिन एक दलित बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और फिर उसकी मौत पर दलितों का हितैशी दिखाने के लिये एक इवेंट का आयोजन किया गया। वो भी अपने दरबारी पत्रकारों के साथ जबकि किसी ने ये नहीं पूछा कि जब निर्भया के साथ दिल्ली में कांड हुआ था तब ये कहां पर थे या राजस्थान में हर दिन हो रहे महिलाओं के साथ अत्याचार के वक्त इनकी आवाज क्यों बंद हो जाती है। आज भी युवाओं के नाम पर इस तरह का आयोजन देखा गया जिसमें कोरोना के नियमो का बिलकुल भी ध्यान नही रखा गया।

आने वाले साल चुनावी है, दिखते रहेंगे ऐसे आयोजन

वैसे जनता यही सवाल कर रही है कि विपक्ष एकदम से इतना मुखर कैसे हो गया है वरना इससे पहले तो सोता ही दिख रहा था। तो भइया आपको बता दे कि आने वाले साल में कई राज्यों के चुनाव हैं ऐसे में खोई हुई जमीन तलाश रहा विपक्ष को सरकार के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा हमला करने के लिये नहीं मिल रहा है तो वो इस तरह से छोटी छोटी बातों को लेकर बड़ा इंवेट करके फिर से खड़ा होने की जुगत लगा रहे हैं। हालांकि उनकी इस कोशिश पर मोदी सरकार उस वक्त पानी फेर देती है जब वो इन बने बनाये मुद्दों की हकीकत खोलकर जनता के सामने रखती है और जनता को विश्वास हो जाता है कि 70 साल में जो कुछ ना कर सके वो 7 सालों में हुए कामों को गलत बता रहे हैं जो एक तरह से कोरा झूठ ही है। इसका उदाहरण इस बात से भी लिया जा सकता है कि जब बंगाल में पीएम मोदी प्रचार करने जाते थे तो यही विपक्ष हल्ला मचाती थी कि पीएम मोदी ने रैली करके देश में कोरोना बड़ा दिया। आज वही लोगों को इख्ट्टा करके कोरोना का नियम तोड़ रहे हैं जिससे कोरोना की तीसरी लहर का खतरा देश में बढ़ रहा है लेकिन अब उन्हें इसकी तनिक भी परवाह नहीं है।

आने वाले महीने देश में ऐसे झूठे इवेंट और देखने को मिलेंगे क्योंकि जैसे जैसे चुनाव करीब आयेगा ये लोग इस तरह के आयोजन और बढ़ा देंगे। पर हमारी आप से अपील है कि कोरोना को ध्यान में रखकर ही ऐसे इवेंट का हिस्सा बने क्योंकि ऐसे लोगों को आप की नहीं बल्कि अपने आप को सत्ता में कैसे लाये इस बात कि चिंता है।