आपदा के वक्त भारत को बदनाम करने का एजेंडा से रहे सावधान

कोरोना आपदा के बाद विश्व में भारत की छवि ऐसे पेश की जा रही है जैसे भारत बहुत कमजोर मुल्क हो और ऐसे छवि बनाने में कुछ दरबारी पत्रकार के साथ साथ विदेशी मीडिया का भी बड़ा रोल देखा जा रहा है। आपने देखा होगा कि पिछले कुछ दिनों से हमारा देश विदेशी मीडिया के लिए नई प्रयोगशाला बन गया है। हमारे देश के अस्पताल, श्मशान घाट, जलती चिताएं, लाशों की कतार और ऑक्सीजन के लिए इधर उधर भटकते मरीजों की तस्वीरें विदेशी अखबारों के पहले पन्ने पर छप रही हैं। कई चैनल हमारे देश के अस्पतालों में जाकर मरीजों का हाल दुनिया को बता रहे हैं। ये मीडिया का कर्तव्य है कि वो इस तरह के संकट में भी कवरेज करे और हालात के बारे में लोगों को बताए लेकिन विदेशी मीडिया कैसे इसकी आड़ में हमारे देश को बदनाम भी कर रहा है जिसके पीछे किसी साजिश की बू आ रही है।

दोहरा चरित्र क्यों?

कई अंतरराष्ट्रीय चैनल के रिपोर्टर्स इस समय भारत के अस्पतालों में ICU वॉर्ड्स की स्थितियां दिखा रहे हैं। वहां जाकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं लेकिन हमारा सवाल है कि जब इसी तरह के हालात अमेरिका में थे, ब्रिटेन में थे और यूरोप के देशों में सैकड़ों लोग कोरोना वायरस से मर रहे थे तब इन चैनलों की रिपोर्टिंग टीम वहां के अस्पतालों में क्यों नहीं गई और क्यों तब इन्होंने अपने देश के ICU वॉर्ड्स का हाल लोगों को नहीं बताया? लेकिन आज ये देश के अस्पतालो में फोटो खीच कर ये दिकाना चाहते है कि भारत की तैयारी सिर्फ हवाहवाई थी जबकि ऐसा कुछ नही है। ऑकड़ो पर नजर डाले तो यूरोप में कुल देशों की संख्या 48 है। इन देशों में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या लगभग साढ़े चार करोड़ है और 10 लाख लोग इस वायरस से मर चुके हैं। अगर हम इन सभी देशों की आबादी को जोड़ भी दें तो ये आंकड़ा लगभग 75 करोड़ होता है। अगर हम इसमें उत्तरी अमेरिका के 39 देशों की कुल आबादी को भी जोड़ दें तो ये आंकड़ा 134 करोड़ के आसपास होता है यानी एक तरफ ये 87 देश हैं और दूसरी तरफ अकेला भारत है। आप कह सकते हैं कि भारत में 87 देशों की आबादी बसती है। लेकिन इसके बावजूद हमारे देश के हालात इन देशों से बेहतर हैं।जहां इन 87 देशों में कोरोना मरीजों की संख्या 8 करोड़ है तो भारत में ये आंकड़ा लगभग 2 करोड़ 27 लाख है। इसके बावजूद इन देशों का मीडिया हमारे देश को बदनाम करता है और हमारे लोगों की जलती चिताओं पर हाथ सेंकता है जिसकी जितनी निंदा हो कम है।

गरिमा और सम्मान में अतंर क्यो?

ऐसा करते हुए पश्चिमी देशों का मीडिया ये भूल जाता है कि अंतिम संस्कार की क्रिया किसी भी परिवार के लिए बहुत ही निजी और कठिन पल होता है। इसलिए इन तस्वीरों से अपने लोगों की उत्सुकता को शांत करना कभी भी जायज नहीं हो सकता। पश्चिमी मीडिया को ये समझना चाहिए कि जो गरिमा और सम्मान वो अपने लोगों को मरने के बाद देते हैं, वैसे ही सम्मान हमारे देश के लोगों को भी मिलना चाहिए लेकिन इस सब के बीच एक रोचक बात ये भी है कि पश्चिम मीडिया को कुछ देश के लोग भी ऐसा करने के लिए उकसा रहे है ये लोग अपने फायदे के लिये इस तरह की घटना को दुनिया में दिखाकर देश को बदनाम करके कही न कही सिर्फ मोदी को सत्ता से हटाना चाहते है जिसके बाद इनके खास लोगो की सरकार बन सके और ये फिर मोटी मलाई खा सके।

ऐसे में देश की जनता को सावधान रहना होगा क्योकि वही इन के हर मनसूबों पर पानी डाल सकती है और इन्हे बता सकती है कि देश का अपमान करने वालो को अब नये भारत की जनता माफ नही करेगी।