आखिरकार बरेली को 54 साल पहले ‘खोया झुमका’ मिल ही गया !

54 सालों के इंतजार के बाद शनिवार को बरेली को उसका गिरा हुआ झुमका आखिरकार वापस मिल गया है। बरेली ने आखिरकार फिल्म अदाकारा साधना का वह झुमका, जो बरेली के बाजार में खो गया था, उसे तलाश लिया है। दरअसल, 1966 में रिलीज हुई फिल्म ”मेरा साया” का गाना ”झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में”… तो आपने सुना ही होगा। इस गाने के रिलीज होने के बाद बरेली का नाम लोगों की जुबां पर चढ़ गया था और इस गाने में एक्ट्रेस अपना झुमका ढूंढ रही थी और वो तलाश अब खत्म हो गई है। दरअसल, अब शहर को वो गिरा हुआ झुमका वापस मिल गया है।

60 की दशक में आई फिल्म मेरा साया के एक गीत ने यूपी के बरेली का नाम लोगों की जुबान पर ला दिया था। आपको याद होगा की यह गाना दिवंगत अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया था। ‘मेरा साया’ फिल्म में सुनील दत्त और साधना ने मुख्य भूमिका अदा की थी। इस गीत को आशा भोसले जी ने गाया था।

खोया झुमका तिराहे पर मिला

बरेली में एनएच 24 पर जीरो पॉइंट पर झुमका तिराहा बनाया गया है, जहां एक विशाल झुमका लगाया गया है। शनिवार को इस झुमके का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने किया। इस मौके पर यहां आए सभी अतिथियों को प्रतीक स्वरूप एक झुमका उपहार में दिया गया।

झुमका तिराहा पर 2 क्विंटल (200 किग्रा) का झुमका 14 फीट ऊंचे खंभे पर लगाया गया है। इसे बनाने में पीतल और तांबे का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि लागत करीब 18 लाख रुपए आई है। गुड़गांव के एक कलाकार ने इसे तैयार किया है।

सिल्वर जुबली पर शुरू किया गया था निर्माण

झुमका लगाने की शुरुआत फिल्म ”मेरा साया” के गाने ”झुमका गिरा रे” के सिल्वर जुबली यानी की 50 साल पूरे होने पर की गई थी। बरेली विकास प्राधिकरण की योजना थी की ये फ़िल्म अभिनेत्री साधना के लिए श्रद्धांजलि भी होगी लेकिन झुमका लगाने के लिए इसमें लगने वाली लागत की वजह से ये नहीं हो पाया क्योंकि बीडीए के पास इतना पैसा नहीं था। जिसके बाद शहर के लोगों से सहयोग मांगा गया। इसके बाद इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक डॉ. केशव अग्रवाल ने झुमका लगाने की जिम्मेदारी ली। जिसके बाद बीडीए के सहयोग से आखिरकार झुमका लगकर तैयार हो गया।

हंसी मजाक में पूछते थे झुमका मिला या नहीं

अकसर बरेली के लोगो से हंसी-मजाक में हमेशा पूछा जाता था कि झुमका मिला या नहीं। आज बरेली को वो झुमका मिल गया और इसके साथ ही वहां के लोगो को इसका जवाब भी।

गौरतलब है की बरेली अपने आप में बहुत सारे इतिहास को समेटे हुए है। अहिक्षत्र का किला, जैन मंदिर, नाथ नगरी, बरेली का सूरमा, बरेली का मांझा, बरेली का फर्नीचर और बरेली की ज़री जरदोजी को पहचान दिलाने की जरूरत है।