आयुष्मान योजना से गरीबों को बीमारी से मिल रही छुट्टी

Ayushman Yojanaहमारे देश का एक बड़ा तबका ऐसा है जो कुपोषण और निम्न जीवन स्तर के कारण तरह-तरह की बिमारियों का शिकार बन जाता हैं| इनके लिए दूसरी बड़ी समस्या है बिमारियों के इलाज में आने वाला खर्च, जो इतना ज्यादा होता है कि गरीबों की ज़िन्दगी निकल जाती है इन पैसों के इन्तजाम में।

इन समस्याओं को मद्देनजर रखते हुए PM मोदी ने सितंबर, 2018 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत उनकी कोशिश रही कि गरीब परिवारों को बीमारी का इलाज करवाने में कोई परेशानी नहीं आये| इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों के करीब 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है।

इस योजना का लाभ अभी तक लाखों लोगों ने उठाया है, कितने ही गरीब परिवारों के लिए आयुष्मान भारत वरदान साबित हो चुकी है| इसके कुछ सफल उदहारण से IndiaFirst ने पहले भी अपने पाठकों को अवगत करवाया है। आज हम ऐसे ही दो परिवार के बारे में बताने जा रहे है, जिनकी जिंदगी में आयुष्मान योजना से खुशियाँ लौट आई है।

बिधूना क्षेत्र के गांव दोणापुर निवासी सर्वेश कुमार गरीब परिवार से ताल्लुक रखते है। वह किसी प्रकार मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। शादी के करीब 15 साल बाद सर्वेश को मन्नतों के बाद संतान सुख मिला। और वो इस ख़ुशी को पाकर काफी प्रसन्न थे। बीती 21 जुलाई को पत्‍‌नी शारदा देवी ने दामिनी को जन्म दिया। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद बच्ची जब घर आई तो मां ने उसे गोद लिया। तब पता चला कि दामिनी पेशाब के रास्ते से ही मल कर रही है और साथ में खून आ रहा। ये सुनकर सर्वेश की ख़ुशी एक ही दिन में चिंता में बदल गई जब पता चला कि बच्ची के मल का रास्ता बंद है।

तंगहाली में जीवन गुजार रहे पिता सर्वेश को किसी ने इटावा के जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परेशान सर्वेश वहां गए पर कोई रास्ता नहीं निकला। हर जगह प्राइवेट ऑपरेशन की बात कही गई। अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते दो महीने बीत गए। एक दिन वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना पहुंचे। वहां कुछ लाभार्थी ने आयुष्मान भारत योजना द्वारा मुफ्त इलाज के बारे में बताया। स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान के जिला समन्वयक डॉ. ज्योतींद्र मिश्रा से सर्वेश की मुलाकात हुई। और डॉ. ज्योतींद्र ने उसका गोल्डन कार्ड बनवाया। कृष्णा हॉस्पिटल से उसे कानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां सात अक्टूबर को सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरके त्रिपाठी ने सर्वेश कुमार की बच्ची दामिनी का सफल सर्जरी किया। डॉ. त्रिपाठी ने बताया था कि बच्ची को इम्परफोरेट ऐनस था। 15 दिन में वह समान्य तरीके से जिंदगी बिताने लगेगी।

आयुष्मान योजना से कानपुर मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क ऑपरेशन द्वारा इस गरीब परिवार को अपनी बच्ची दामिनी के बीमारी से छुटकारा मिल सका और फिर से उसके जीवन में खुशियों का उजाला भर गया।

वही दूसरी तरफ करौली जिले के मातासूला गांव निवासी निरंजन जांगिड़ और उसके परिवार के लिए आयुष्मान भारत योजना जीवनदायिनी साबित हुई है। निंरजन जागिड को अनेक वर्ष से हदय रोग की समस्या थी। जयपुर के निजी अस्पताल में इलाज कराने गया तो डॉक्टरों ने बताया की हृदय की सर्जरी होगी। गरीबी के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था। आयुष्मान योजना गोल्डन कार्ड से उसका नि:शुल्क इलाज सम्भव हुआ।

इस योजना से निरंजन जांगिड़ की नि:शुल्क हार्ट सर्जरी हो गई। इस प्रकार आयुष्मान योजना ने एक परिवार की खुशियां छिनने से बचा लिया।

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। और यह योजना स्वस्थ भारत की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।