बाबा रामदेव की पतंजलि निकली आगे, ओरल केयर में कोलगेट-HUL की बिक्री घटी

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जिस तरह से 2014 के बाद यानी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वदेशी चीज़ो को बढ़ावा दिया गया है वैसे पहले किसी सरकार ने नहीं किया था, चाहे को गाँधी जी पहनावे यानी खादी की बात कर लें या फिर स्वदेशी जड़ीबूटियों का। भाजपा सरकार ने देश की धरोहर को बढ़ावा दिया है जिसका परिणाम ये हुआ है कि पतंजलि आज बड़े से बड़े ब्रांड को टक्कर दे भी रही है और बाजार में उनसे आगे भी निकल रही है|

योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने एक बार फिर विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों के कारोबार पर प्रहार किया है। इस बार पतंजलि आयुर्वेद ने ओरल केयर सेक्टर में विदेशी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है।

पतंजलि के दंत कांति की मांग बढ़ी

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Nielsen data के अनुसार, 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कोलगेट के मार्केट शेयर में 210 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई है और यह अब 49.4 फीसदी रह गया है। कोलगेट के मार्केट शेयर में यह गिरावट इसके मुख्य उत्पादों कोलगेट डेंटल क्रीम, एक्टिव साल्ट और सिबाका की बिक्री घटने के कारण आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलगेट का मार्केट शेयर घटने का मुख्य कारण पतंजलि आयुर्वेद के दंत कांति की बिक्री बढ़ना है। रिपोर्ट के अनुसार, समान अवधि में ओरल सेक्टर में पतंजलि आयुर्वेद की बाजार हिस्सेदारी में 150 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है और अब इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 8.6 फीसदी हो गई है। आपको बता दें कि कोलगेट के डेंटल उत्पाद अमेरिकी कंपनी कोलगेट पामोलिव बनाती है और इसका मुख्यालय अमेरिका के मेनहट्टन में है।

HUL ने भी खोई बाजार हिस्सेदारी, डाबर को फायदा

पतंजलि आयुर्वेद को प्रमुख प्रतिद्वंदिता देने वाली हिन्दुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड (HUL) ने भी पिछले वित्त वर्ष में ओरल सेक्टर में अपनी हिस्सेदार गंवाई है। Nielsen data के अनुसार, इस अवधि में HUL की बिक्री में 80 बेसिस प्वाइंट की कमी आई है और अब इसकी बाजार हिस्सेदारी 16.4 फीसदी रह गई है। इसके उलट भारतीय कंपनी डाबर ने ओरल सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। समान अवधि में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के साथ  डाबर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 13 फीसदी हो गई है|

कोलगेट ने तीन साल में खोई बड़ी बाजार हिस्सेदारी

जैफरीज के विश्लेषक वरुण लोहचब का कहना है कि कोलगेट ने अपनी गिरती बाजार हिस्सेदारी को रोकने के लिए कोई निवेश नहीं किया है। लोहचब के अनुसार, कोलगेट ने पिछले तीन सालों में अपनी बाजार हिस्सेदारी 800 बेसिस प्वाइंट तक खो दी है। लोहचब का कहना है कि डाबर और पतंजलि की ओर से बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की संख्या धीमी गति से बढ़ाई जा रही है। इसके बावजूद इस श्रेणी में कोलगेट को टक्कर देने के लिए काफी उत्पाद उपलब्ध हैं। कोलगेट अपने स्वर्ण वेदशक्ति की सफलता के बल पर बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की सोच रहा है जो संभव नहीं दिख रहा है।


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