कोरोना काल में आयुर्वेद को विश्व में मिली नई पहचान

कोरोना काल में समूचे भारत की छवि एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरी है इस बात पर कोई संदेह नही कर सकता है। मोदी सरकार ने इस बुरे दौर में देशवासियों की जान भी बचाई और विश्व में जहान भी और इसके पीछे कही न कही भारतीय संस्कृति की एक बड़ी देन रही ये बात खुद पीएम मोदी भी मानते है, खुद उन्होने दो नए आयुर्वेद संस्थान को देश को समर्पित करते हुए ये बात भी बताई।

दो नए आयुर्वेद संस्थान की हुई शुरूआत

पीएम मोदी ने गुजरात और राजस्थान में दो आयुर्वेद संस्थानों का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में आयुर्वेद की परंपरा ने देश को फायदा पहुंचाया है। कोरोना काल में हल्दी समेत अन्य चीजों ने इम्यूनिटी बूस्टर का काम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में आज दुनिया आयुर्वेद को लेकर कुछ नया जानना चाहती है और इस बारे में रिसर्च कर रही है। इतना ही नही देश में वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है, साथ ही दुनिया के 100 से अधिक स्थानों पर आयुर्वेद की औषधि को लेकर रिसर्च चल रही है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ये हमेशा से स्थापित सत्य रहा है कि भारत के पास आरोग्य से जुड़ी कितनी बड़ी विरासत है। इस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाना जरूरी है। गुजरात के जामनगर में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया गया है। जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। 2016 से ही देश में धनवंतरी जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

हमारा ज्ञान दूसरे देशों को भी समृद्ध कर रहा है

कोरोना काल में जिस तरह से आयुर्वेद को विश्व ने अपनाया है उससे समूचे विश्व में आज भारत की छवि निखरी है। कल तक जो देश आयुर्वेद की अनदेखी करते थे वो आज इसी गंभीरता से ले रहे है पीएम मोदी ने कहा कि किस भारतीय को खुशी नहीं होगी कि हमारा पारंपरिक ज्ञान, अब अन्य देशों को भी समृद्ध कर रहा है। गर्व की बात है कि WHO ने Global Centre for Traditional Medicine की स्थापना के लिए भारत को चुना है। इससे यही पता चलता है कि आज भारत की विश्व में क्या छवि बन रही है और ये सब देश की जनता की मेहनत का ही असर है कि भारत को विश्व गुरू के रूप में फिर से उभर रहा है। वैसे भी भारत का इतिहास रहा है कि जब जब मानवता को भारत की जरूरत पड़ी है भारत ने आगे बढ़कर मानवता के लिये काम किया है फिर वो कोरोना काल हो या कोई दूसरी विपदा हमेशा भारत आगे बढ़कर दुनिया को विपदा से बाहर निकालता रहा है।

 

ऐसे में अब हमे अपने पुरखों के ज्ञान को आगे बढ़ाने की जरूरत है। भारत के पास आरोग्य से जुड़ी कितनी बड़ी विरासत है। लेकिन ये भी उतना ही सही है कि ये ज्ञान ज्यादातर किताबों में, शास्त्रों में रहा है और थोड़ा-बहुत दादी-नानी के नुस्खों में, इस ज्ञान को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाना आवश्यक है और इसके लिये समूचे देश को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा जिससे आरोग्य के क्षेत्र में भी हम आत्मनिर्भर बन सके और दुनिया को भी बना सके।