अयोध्या अब बनेगा धार्मिक पर्यटन का केंद्र

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Ayodhya will be the center of religious tourism

अयोध्या भूमि विवाद मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार त्रेतायुग जैसी नई अयोध्या का सपना साकार करने की तैयारी में जुट गई है। सरकार की मंशा इसे धर्मिक पर्यटन का प्रमुख स्थल बनाने की है। यही कारण है कि 2017 के बाद से प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद पिछले ढाई साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दर्जनों बार अयोध्या गए और वहां रामलला के दर्शन भी किए। अब रामलला के पक्ष में कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की योगी सरकार ने वैष्णो देवी और तिरुपति से भी ज्यादा आधुनिक सुविधायुक्त नई अयोध्या बसाने का खाका बनाने का काम शुरू कर दिया है। शीर्ष अधिकारी बताते हैं कि राममंदिर ट्रस्ट का स्वरूप बड़ा करके पहले से तैयार भव्य अयोध्या के लिए लंदन की कंसल्टेंट एजेंसी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स को शामिल करने की योजना है।

लाखों रुपये खर्च करके तैयार इस रिपोर्ट को पिछले एक साल से सिर्फ इसलिए रोक दिया गया था कि पहले अयोध्या विवाद का फैसला आ जाए। नए अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के साथ सरयू में क्रूज, आधुनिक बस अड्डा, विश्व की सबसे ऊंची प्रभु राम की प्रतिमा, अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल-रिजॉर्ट्स के साथ प्रभुराम से जुड़े स्थलों को वाया प्रयागराज-चित्रकूट से लेकर रामेश्वरम और लंका तक श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन और अध्यात्म से जोड़ने की योजना पर काम शुरू हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2.77 एकड़ में रामलला का मुख्य गर्भगृह मंदिर बनेगा। साथ ही अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि चार और मंदिरों के साथ सर्वधर्म समभाव का समूचा दर्शन कराने की योजना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही दिव्य दीपोत्सव के जरिए त्रेतायुग में रावण का वध करके भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी को जीवंत करके विश्व में यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं का द्वार खोल चुके हैं।

अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देकर अयोध्या को त्रेतायुग जैसी नगरी बनाने का दायित्व राममंदिर ट्रस्ट के जरिए मिल चुका है। अयोध्या मे हालात सामान्य होते ही नई अयोध्या के खाका पर प्रशासन काम करेगा।

सरकार कर रही है भव्य विकास की तैयारी

अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अयोध्यावासियों के लिए गौरव का क्षण है।

अब संपूर्ण अयोध्या के पर्यटन विकास पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे। राममंदिर ट्रस्ट न सिर्फ मंदिर बनाएगा बल्कि रामनगरी को त्रेतायुग जैसी संरचना देगा।

फैसले के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भव्य राममंदिर के साथ नव्य अयोध्या को लेकर भव्य प्लान की तैयारी शुरू हो गई है।

बता दें कि राम नगरी प्रोजेक्ट के तहत सरकार की यहां सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। इसके लिए वह 500 करोड़ रुपये मंजूर भी कर चुकी है। यूपी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘एक नई अयोध्या विकसित करने की योजना है, क्योंकि भगवान राम के जन्मस्थान होने की वजह से अयोध्या लोगों की आस्था का केंद्र भी है।

हेरिटेज होटल व रिजॉर्ट्स की बढ़ेगी डिमांड

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि अयोध्या विवाद से दस बड़े प्रोजेक्ट पंजीकरण के बाद भी आगे नहीं बढ़ रहे थे। अब राजा अयोध्या के राजसदन को पांच करोड़ से अधिक खर्च करके हेरिटेज होटल बनाने का प्रस्ताव है।

इसी के साथ फैजाबाद शहर में कोहिनूर पैलेस भी हेरिटेज होटल विकसित होगा। इसके अलावा दो करोड़ से दस करोड़ की लागत से आठ होटल और रिजॉर्ट्स जल्द बन जाएंगे।

पर्यटन विभाग इसकी सारी औपचारिकताएं पूरी करा रहा है। इसके अलावा श्रद्धालुओं-पर्यटकों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब छह सौ करोड़ से राम की पैड़ी, गुप्तारघाट, आधुनिक बस अड्डा, क्वीन हो पार्क, रामकथा पार्क समेत शहर को लाइटिंग से सुसज्जित करने की योजना बना रही है।

निम्न काम जल्द दिखेंगे

– विश्व की सबसे बड़ी 251मीटर ऊंची श्रीराम की प्रतिमा
– श्रीराम हवाई अड्डे का अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के तौर पर विस्तार
– अयोध्या से कोलकाता तक क्रूज का संचालन
– अयोध्या शहर के चारों तरफ रिंग रोड
– अयोध्या रेलवे स्टेशन का विस्तारीकरण
– 84 परिक्रमा मार्ग का फोरलेन निर्माण

अयोध्या में भी दिखेगा मोदी प्लान

काशी से सांसद बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से वहां शहरी विकास के साथ विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर के जरिए आमूल-चूल बदलाव किया। अब वैसा ही प्लान रामनगरी अयोध्या में दिखेगा।

रामलला का मंदिर बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद ने 140 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया था। जबकि विश्वनाथ कॉरिडोर का बजट 700 करोड़ का था। अब 70 एकड़ में राममंदिर बनाने में विहिप से कई गुना अधिक खर्च आएगा।


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