सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई आज से शुरू

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Ayodhya dispute begins in Supreme Court today

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज से शुरू हुई । सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि उनका 100 सालों से विवादित जमीन पर कब्जा रहा है। बता दें कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता असफल होने के बाद शीर्ष अदालत ने आज से रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया था।

निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने शीर्ष अदालत के सामने पक्ष रखा। अखाड़ा ने दलील दी कि उसका इस जमीन पर सैकड़ों सालों से हक था। वकील ने इस अहाते पर मालिकाना हक का दावा किया। शीर्ष अदालत को वकील ने नक्शा दिखाते हुए कहा कि उनका सूट विवादत परिसर के अंदरूनी हिस्से को लेकर है। उन्होंने दलील दी, ‘इसपर पहले हमारा कब्जा था। बाद में दूसरे ने बलपूर्वक कब्जे में ले लिया। इस जमीन पर हमारा 100 साल से कब्जा था। यह जगह राम जन्मस्थान के नाम से जानी जाती है। यह पहले निर्मोही अखाड़े के कब्जे में थी। निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा, ‘मेरी मांग केवल विवादित जमीन के आंतरिक हिस्से को लेकर है, जिसमे सीता रसोई और भंडार गृह भी शामिल है। ये सभी हमारे कब्जे में रहे हैं। वहां पर उन्होंने हिंदुओं को पूजा पाठ की अनुमति दे रखी है। दिसंबर 1992 के बाद उक्त जगह पर उत्पातियों ने निर्मोही अखाड़ा का मंदिर भी तोड़ दिया था। निर्मोही अखाड़ा ने कोर्ट में कहा कि निर्मोही अखाड़ा 19 मार्च 1949 से रजिस्टर्ड है। झांसी की लड़ाई के बाद ‘झांसी की रानी’ की रक्षा ग्वालियर में निर्मोही अखाड़ा ने की थी।’

निर्मोही अखाड़े की ओर से पेश वकील सुशील जैन अपनी दलीलों में उन पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिनके मुताबिक किसी ऐसी जगह को मस्जिद करार नहीं दिया जा सकता, अगर वहां पर नमाज नहीं पढ़ी जा रही हो। निर्मोही अखाड़े की ओर से वकील सुशील जैन ने दावा किया कि विवादित जमीन पर मुस्लिमों ने 1934 से पांचों वक्त नमाज पढ़ना बंद कर दिया था। 16 दिसंबर 1949 के बाद तो जुमे की नमाज पढ़ना भी बंद हो गया। 22-23 दिसंबर 1949 को वहां अंदर मूर्तियां रखी गई।

एक अगस्त यानि की बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में बड़ा फैसला लेते हुए ये एलन किया था की 6 अगस्त से अब इस मामले की सुनवाई रोजाना होगी | गौरतलब है की पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की इस मामले को आपस में बैठ कर सुलझाने की कोशिश करे | जिसके लिए मध्यस्थता कमिटी भी गठित की गयी थी पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ | और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है |

बता दे की इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ करेगी | इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं |

हफ्ते में मंगलवार, बुधवार, गुरुवार को होगी सुनवाई

इस मामले में एक अगस्त को मध्यस्थता को भंग करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने मामले की रोजाना सुनवाई का फैसला सुनाया | और इसी क्रम में अब इस मामले की सुनवाई हफ्ते में तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी | बता दे की सोमवार और शुक्रवार का दिन सुप्रीम कोर्ट में नए मामलों की सुनवाई के लिए तय किया गया है |

मध्यस्थता से कोई हल नहीं निकल पाया

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की 8 मार्च की सुनवाई में पूर्व जज जस्टिस एफएम कलीफुल्ला ने मध्यस्थता कमिटी का गठन किया और कहा की समिति आपसी समझौते से सर्वमान्य हल निकालने की कोशिश करे | बता दे की मध्यस्थता कमिटी में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू को शामिल किया गया था | पुरे 155 दिन के विचार विमर्श के बाद मध्यस्थता समिति ने 1 अगस्त सीलबंद लिफाफे में फाइनल रिपोर्ट पेश की जिसमे लिखा था की मध्यस्थता कमिटी आपसी सहमती बनने में असफल रही है | और इस रिपोर्ट को देखने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमिटी को भंग करते हुए इस मामले की सुनवाई रोजाना करने का फैसला सुनाया |

 


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