अयोध्या केस: जानिए रामलला के वकील परासरन के बारे में

Ayodhya_dispute

सर्वोच्च न्यायालय में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई अब पूरी हो गयी है। अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट में चली 40 दिनों की लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने एक-दूसरे के खिलाफ जबर्दस्त तर्क दिए। कोर्टरूम में ऐसे कई मौके आए जब दोनों पक्षों (मुस्लिम पक्ष और रामलला विराजमान) के वकील ने एक-दूसरे को जबर्दस्त तरीके से हराने की कोशिश की। यहां तक कि सुनवाई के अंतिम दिन मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वक्फ बोर्ड) के वकील राजीव धवन ने कोर्टरूम में ही हिन्दू महासभा के वकील परासरन द्वारा पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया।

आइये आपको बताते है रामलला के वकील परासरन के बारे में:

Ram Lalla's lawyer Parasaran

वकालत की दुनिया में 92 साल के परासरन की क्या हैसियत है, इसका अंदाजा आपको इस बात से लग जायेगा, जब साल 2016 से परासरन कोर्ट में काफी कम दिखने के बावजूद, हाल के दिनों में देश के दो बड़े केस की पैरवी के लिए उन्हें चुना गया। इन दोनो केसों ने इन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है। पहले सबरीमाला (Sabarimala) और फिर अयोध्या केस।

आपको जानकार आश्चर्य होगा की अयोध्या (Ayodhya) केस की सुनवाई के शुरूआती दौर में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक अलग तरह का वाक्या देखने को मिला। रामलला की तरफ से अपना पक्ष रखने के लिए जैसे ही 92 साल के वरिष्ठ वकील परासरन (Parasaran) अपनी सीट से खड़े हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगई (Chief Justice Ranjan Gogoi) ने उनसे पूछा, ” क्या आप बैठ कर बहस करना चाहेंगे? इस पर उन्होंने कहा कोई बात नहीं खड़े हो कर बहस करने की परंपरा रही है।”

हिन्दू धर्मग्रंथों पर है अच्छी पकड़

1970 के दशक से ही परासरन खासे लोकप्रिय रहे हैं। हिंदू धर्मग्रंथों पर उनकी अच्छी खासी पकड़ रही है। उनका जन्म 1927 में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के श्रीरंगम में हुआ। उनके पिता केसवा अयंगर मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकील थे। परासरन के तीनों बेटे मोहन, सतीश और बालाजी भी वकील हैं। यूपीए-2 के कार्यकाल में वो कुछ समय के लिए सोलिस्टर जनरल (Solicitor General) भी थे।

परासरन ने 1958 में सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। आपातकाल के दौरान, वह तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे और 1980 में भारत के सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए थे। इसके अलावा इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों के दौरान 1983 से 1989 तक वो भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में कार्य कर चुके है।

साल 2003 में उन्हें पद्म भूषण साल 2011 में पद्म विभूषण से अलंकृत किया जा चुका है। साल 2012 में राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया था।

केस खत्म करना अंतिम इच्छा

सुप्रीम कोर्ट में जब सीनियर वकील राजीव धवन ने अयोध्या केस में हर रोज सुनवाई पर आपत्ति जताई थी तो परासन ने कहा था, “मरने से पहले मेरी अंतिम इच्छा इस केस को पूरा करना है।” रामलला के वकील ने कहा कि ये मामला दशकों से लटका हुआ है, इसलिए इसका समाधान होना चाहिए। पुरातत्व विभाग के सबूत दिखाते हैं कि मस्जिद से पहले भी उस स्थान पर कुछ निर्माण था।

बता दे की सबरीमला केस में परासन ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध के समर्थन में केस लड़ा था।