मोदी सरकार की आर्थिक पैकेज की वैक्सीन से मिलने लगे शुभ संकेत

 जब अर्थजगत से जुड़े संगठन देश की GDP की गिरावट की बात कर रहे थे तो कुछ लोग इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमले पर हमले बोले जा रहे थे। लेकिन जिस तरह से मोदी जी की नीतियों के चलते देश की गिरती अर्थव्यवस्था संभाला जा रहा है। इस बात की तारीफ अब अर्थजगत से जुड़ी संस्थानों ने शुरू किया तो ये लोग बिलकुल चुप बैठ गये है। कोरोना काल में जहान हो या फिर जान दोनो को बचाने में मोदी सरकार पूरी तरह से सफल हो रही है और ये बात दुनिया के संगठन भी मान रहे है। इसी क्रम में कोरोना काल में जिस तरह के आर्थिक सहायता के पैकेज की घोषणा मोदी सरकार ने की उससे मूडीज हो या गोल्डमैन सभी ये मान रहे है कि भारत की GDP चालू वर्ष में बेहतर रहने वाली है।

मूडीज, गोल्डमैन दोनो ने भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट का अनुमान कम किया

जिस तरह से कोरोना काल में लॉकडाउन लगने से सबसे ज्यादा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा उससे उबारने में मोदी सरकार के राहत पैकेज काफी असरदार साबित हो रहे है और ये बात हम नही बल्कि विश्व अर्थजगत से जुड़े संगठन भी मान रहे है। उनका अनुमान है कि भारत का चालू वित्तवर्ष में ही गिरावट का सिलसिला थमेगा। गोल्डमैन की माने तो पहले जहां उनका अनुमान था कि भारत की GDP इस चालू वर्ष में 14.8 फीसदी रहेगी लेकिन अब उनका मानना है कि ये  अब घटकर 10.3 फीसदी रह गई है। तो दूसरी तरफ मूडीज का भी मानना है कि भारत की GDP 10.6 फीसदी के आसपास रहेगी जो एक शुभ संकेत है। दोनो संगठनों की माने तो ये मोदी सरकार की नीतियों के चलते ही हुआ है। आत्मनिर्भर योजना के तहत जिस तरह से हर वर्ग के कारोबारियों को सरकार ने मदद दी है उससे देश में बंद पड़ा उत्पादन का पहिया फिर से घूम गया है जिस वजह से ही देश की GDP में सुधार के संकेत मिल रहे है।

 

 

विदेशी मुद्रा भंडार 448.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 448 अरब डॉलर के पार 448.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, चार अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 44.1 अरब डॉलर बढ़कर 448.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

अगले साल GDP ग्रोथ दो अंकों के पार!

इनवेस्टमेंट और ब्रोकेरेज फर्म यानी की CLSA की माने तो आने वाले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये बेहतर होने वाले है। जिस तरह से देश में विदेशी निवेश बढ़ा है तो दूसरी तरफ उत्पादन भी देश में बढ़ रहा है उससे देश की जीडीपी ग्रोथ 13 फीसदी तक जा सकती है जो एक शुभ संकेत होगा। हालाकि इसके लिये मैन्युफैक्चरिंग के साथ साथ दूसरे सेक्टरों को भी तेजी से आगे बढ़ना होगा। हालाकि सरकार की योजना जिस तरह से हर कारोबार को बढ़ाने में लगी है। उससे यही लगता है कि कोरोना काल के बीच में ही भारत वो देश होगा जो फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा और आगे बढ़ सकेगा।

फिलहाल सरकार का पूरा जो अब कोरोना काल में अर्थव्यवस्था के पहिये को दौड़ाने का है जो वो तेजी के साथ कर भी रही है। बस इसमे सरकार का साथ हमे भी देना होगा जिससे तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होकर खड़ी हो सके।

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