लॉकडाउन खत्म होते ही, सियासत के अखाड़े में उतरे सियासी पहलवान

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कोरोना में लागू लॉकडाउन में न केवल देश के आर्थिक रथ को रोक रखा था बल्कि देश की सियासत की चाल को भी मंद कर दिया था। मानो जैसे सियासी गतिविधियां एक तरह से ठप सी हो गई थीं। लेकिन लॉकडाउन से अनलॉक की ओर देश बढ़ गया है। जहां कलकारखानों में रौनक वापस देखने को मिल रही है तो  अब राजनीतिक हलचलें फिर शुरू होंगी। जिसकी शुरूआत बीते दिन अमित शाह जी की वर्चुअल रैली के साथ हो गई है।

राज्यसभा चुनाव में दंगल

सबसे पहले बात करते है राज्यसभा चुनाव की, सरगर्मी से  19 जून को राज्यसभा की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासत की शंतरंज में चाले चली जा रही है। आलम ये है कि कई राज्य में विधायक इस्तिफा देकर जोड़ तोड़ की सियासत को तेजी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार राज्य सभा के चुनाव में खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में एक दूसरे को हराने के लिये सियासदान चालें चलने लगे हैं। हालाकि राज्यसभा का चुनाव दोनो ही पार्टियों के लिये काफी अहम और नाक का सवाल बन गया है ऐसे में कोरोना के चलते पहले इन चुनाव को लेकर नेताओं में जोश हल्का था लेकिन अब जैसे जैसे तारीख करीब आ रही है और लॉकडाउन में भी छूट मिल रही है नेतागिरी भी शुरू हो गई है हालाकि ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन ये जरूर है कि इस बार राज्यसभा का चुनाव काफी दिल्चस्प होने वाला है क्योंकि इसबार कई दिग्गज इस चुनाव के जरिये संसद में दाखिल होना चाहते हैं। इसलिये जोड़तोड़ खूब देखी जायेगी।

बिहार चुनाव का रण

बिहार जहां विधानसभा चुनाव इस साल अक्टूबर या नवंबर में होने वाले हैं ,पहले कयास लगाया जा रहा था कि इसबाबत अधिसूचना अगस्त में जारी हो सकती है। हालांकि चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार अभी बिहार चुनाव के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगा। लेकिन अब इस राज्य को लेकर सियासत के अखाड़े में नेता उतरने लगे हैं जिसका आगाज गृहमंत्री अमित शाह ने वर्चुअल रैली कर भी दिया है।  वहीं 7 जून और 15 जून को राज्य के सीएम इसी तरह की रैली करके चुनाव कक शंखनाद कर सकते हैं। लेकिन यहां ये भी गौर करने वाली बात है कि कोरोना काल में सियासत करने का तरीका भी बदल गया है। तभी तो अब आने वाले दिनो में आपको बड़ी रैलियां देखने को नही मिलेगी बल्कि इसी तरह की हाइटेक रैली देखने को मिलेगी। जिससे एक बात अच्छी होगी कि चुनावी खर्चे पर लगाम लगेगी। जो कोरोना काल में आर्थिक तौर पर एक अच्छा कदम होगा। लेकिन ये भी तय मान लीजिये की जो पार्टी नये तौर तरीके में माहिर होगी वही ज्यादा अच्छी तरह से बात जनता तक पहुंचा पायेगी। इसलिये सियासत में बिहार चुनाव इस बार बहुत को बदलने वाला चुनाव भी कहलायेगा तो इसमे आश्चर्य करने की जरूरत नही।

लब्बोलुबाब बस इतना है कि देश की सियासत में धार देने के लिये अब नेता तैयार हो गये हैं, इस बार वो नये कलेवर में दिखेंगे और इसके साथ साथ चुनाव प्रचार भी बिलकुल नये तरीके का होगा। जो ये बतायेगा कि कोरोना काल ने आखिर देश को कितना बदल दिया है।


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