आईएएस अब्दुल नसर – गरीबी ने पहुँचाया अनाथालय, पर IAS बनने का सपना नहीं टुटा

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अपने पाठकों की दृढ़ शक्ति को और भी मजबूत करने तथा उन्हें प्रेरणा देने के लिए IndiaFirst कई प्रेरणादायक लोगों की संघर्षपूर्ण कहानियों को लेकर आता है| ताकि मेहनत और परिश्रम की राह पर आपका आत्मबल कभी भी कमजोर न पड़े| आज भी हम अपने पाठकों को एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका जीवन गरीबी के कारण अनाथालय में गुजरा, पर आज अपने आत्मबल और विश्वास के बलबूते उन्होंने अपना IAS बनने के सपने को पूरा किया है|

आज की कहानी है आईएएस अब्दुल नसर की

Kollam_Collector_Abdul_Nasar

केरल के निवासी अब्दुल नसर छः भाई-बहनों में सबसे छोटे थे| जब वे पांच साल के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी, उसके बाद उनका परिवार गरीबी के दलदल में फंस गया| गरीबी के कारण उनकी मां मंजूनम्मा ने उन्हें अनाथालय में छोड़ दिया| कुछ समय बाद उनकी माँ की भी मृत्यु हो गई|

अब्दुल से बातचीत पर उन्होंने बताया कि बचपन में उनकी पढ़ाई अनाथालय के प्राइमरी स्कूल में हुई उसके बाद उन्होंने इंग्लिश से ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन किया| अपनी पढाई का खर्चा उठाने के लिए अब्दुल ने त्रिवेंद्रम और कोजीकोड में कई नौकरियां भी की| आगे बताते हुए अब्दुल ने कहा कि उन्होंने होटल और दुकानों में बतौर डिलीवरी बॉय और क्लीनर भी काम किया| 16 साल की उम्र में उन्होंने कैशियर, न्यूजपेपर डिस्ट्रीब्यूटर, एसटीडी बूथ ऑपरेटर और ट्यूशन टीचर की नौकरी भी की|

सूत्रों के अनुसार अब्दुल की बतौर हेल्थ इंस्पेक्टर नियुक्ति हो गई पर सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारियां उन्होंने नहीं छोड़ी| साल 1994 में जब केरला पब्लिक सर्विस कमिशन ने डिप्टी कलेक्टर का नोटिफिकेशन निकाला तो अब्दुल इस परीक्षा की तयारी में जुट गए| उनके मुताबिक अगर वो डिप्टी कलेक्टर के तौर पर सीधे भर्ती हो जाते है तो आगे चलकर, प्रमोशन के जरिए आईएएस की रैंक हासिल कर सकते हैं|

साल 2006 में अब्दुल का चयन बतौर डिप्टी कलेक्टर हुआ और 11 साल तक सेवा देने के बाद साल 2017 में उन्हें केरल के कोल्लम जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया|

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत थे प्रेरणास्रोत

अब्दुल अपनी IAS बनने की प्रेरणा, नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत को बताते है| वो कहते है कि जब वो स्कूल में थे तब अमिताभ कांत सब कलेक्टर थे और एक दिन वो उनके स्कूल के दौरे पर आये थे| अब्दुल के मुताबिक, एक यंग आईएएस ऑफिसर को देखने के बाद मैंने भी आईएएस बनने का सपना देखा|

अब्दुल की सफलता की राह आसान नहीं थी, फिर भी वो रुके नहीं और आखिर में अपने सपने को पूरा किया| अब्दुल ने सिद्ध किया कि, जिसके अन्दर जूनून और जज्बा है उसकी सफलता के रास्ते में कोई नहीं आ सकता| हम सबको भी इन महान हस्तियों के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए|

 


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