Article 370 : नहीं मिली पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मदद, अमेरिका, रूस और चीन ने भी किया निराश

Article 370

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 ख़त्म करने के सरकार के फैसले के बाद से ही पाकिस्तान की परेशानियाँ बढ़ गयी थी| भारत सरकार के इस फैसले पर पाकिस्तानी ने न जाने कितने ही इल्जाम लगाये| सोमवार को भारत सरकार ने आर्टिकल 370 ख़त्म करने का फैसला लिया, उसके बाद से पाकिस्तान इस फैसले को रद्द करवाने की कवायद में लगा था|

इस क्रम में पाकिस्तान ने कई देशों को गुहार लगायी ताकि कोई विरोध के लिए साथ आ जाये| पर पाकिस्तान को हर दरवाजे से निराशा ही हाथ लगी है, और हर देश ने उसकी अपील को मानने से इंकार कर दिया है| बता दें कि भारत सरकार के फैसले का विरोध करते हुए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को बीते 6 अगस्त को पत्र लिखकर दखल देने की अपील की थी|

संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर फैसले में दखल देने की अपील की

दुनिया को भी सच पता है

बता दें कि पाकिस्तान ने यूएनएससी प्रेजिडेंट और पोलैंड के राजनियक, जोना रोनेका और यूएन जनरल असेंबली की प्रेजिडेंट मारिया-फर्नेंडा एस्पिनोसा गार्सेज को 6 अगस्त को पत्र भेजा था| जिसमे पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दोनों से कश्मीर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी| पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने 1948 के यूएएनएससी रेजॉलुशन 48 के खिलाफ जाकर जम्मू-कश्मीर का अनाधिकारिक अधिमिलन कर लिया है|

संयुक्त राष्ट्र ने खारिज की पाकिस्तान की अपील और याद दिलाया 1972 का द्विपक्षीय समझौता

UNSC

पर बीते गुरुवार को पाकिस्तान की इस बेतुकी अपील को खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने उसे बहुत बड़ा झटका दिया| साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने बयान जारी करते हुए कहा, ‘महासचिव ने भारत-पाकिस्तान को 1972 के द्विपक्षीय समझौते की याद दिलाई जो शिमला समझौता के रूप में जाना जाता है| जिसमें जम्मू और कश्मीर पर आखिरी समाधान यूएन चार्टर के तहत शांतिपूर्ण तरीकों से निकाला जाएगा|’

सबसे बड़ा धोखा तो पाकिस्तान को चीनी सरकार और तालिबान से मिला| जिस चीन को पाकिस्तान ने अपना सुपर हीरो माना था इस बार उसने भी भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देने से इंकार कर दिया|

भारत ने UN से स्पष्ट किया आर्टिकल 370 ख़त्म करने का फैसला किसी प्रावधान के खिलाफ नहीं

पाकिस्तान के इल्जाम का मुहतोड़ जवाब देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि 1948 के यूएएनएससी रेजॉलुशन के ठीक 6 साल के बाद 1954 में कश्मीर की परिस्थितियों के अनुकूल आर्टिकल 370 को भारतीय संविधान में शामिल किया गया था| जिसे 2019 में एक बार फिर कश्मीर के विकास को प्राथमिकता देते हुए हटा दिया गया है| ये दोनों ही फैसले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के बाद लिए गए है और इसलिए जिस प्रकार पहला फैसला कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता है, उसी तरह दूसरा फैसला भी किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है|

अमेरिका और रूस से भी पाकिस्तान को निराशा के साथ ही वापस किया गया

रूस ने दिया भारत का साथ

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के द्वारा जारी बयान के मुताबिक अमेरिका अपनी कश्मीर नीति पर अभी भी अटल है और उसका मानना है कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है| अमेरिका ने अपने उप-विदेश मंत्री सुलिवन के भारत और थिम्पू दौरे के बारे में भी बताया और इस दौरे की मंशा दोनों देशों के साथ अमेरिका की पार्टनरशिप को मजबूती प्रदान करना बताया जो इंडोपसिफिक रीजन में कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है|

दूसरी तरफ रूस ने भी पाकिस्तान का साथ देने से इंकार कर दिया, उल्टा रूस ने खुलकर भारत के इस फैसले का स्वागत किया है| शनिवार को रुसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत ने अपने संविधान के दायरे में रहते हुए जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदला और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा है और भारतीय सरकार का ये फैसला बिलकुल नैतिक है| साथ ही रूस ने ये भी कहा कि वो बहुत पहले से ही भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सामान्य रखने का लगातार समर्थन करता रहा है और उसे उम्मीद है की भारत-पाकिस्तान राजनीतिक और राजनयिक प्रयासों से अपने मतभेद सुलझा लेंगे|

खैर ये तो रूस की उम्मीद है जो उसने ज़ाहिर कर दी है| पर इस तथ्य से तो हम सब अवगत हैं कि पाकिस्तान ने न तो इस मसले का हल बातचीत से सुलझाने की कोशिश की थी और ना ही करेगा| अगर भारत इस मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है तो पाकिस्तान को इससे भी आपत्ति है|