सेना को मिलेंगे पी-8आई एयरक्राफ्ट, NASAMS II, और सी गार्जियन (प्रीडेटर-बी) ड्रोन – छह ख़रब का सौदा

डोनाल्ड ट्रंप-नरेंद्र मोदी

आतंकी हमलों और पडोसी देशों की बढ़ती सामरिक शक्तियों के मद्देनजर PM मोदी देश की सुरक्षा को हर तरीके से मजबूत बनाना चाहते हैं| भारतीय सेना को हर तरह के आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए रक्षा उपकरणों के देश में ही निर्माण को बढ़त तो दी ही जा रही है, साथ ही साथ अत्याधुनिक उपकरणों और साजी-सामान के लिए अन्य विकसित देशों से करार भी किया जा रहा है|

भारत और रूस के बिच हुए मिसाइल डिफेंस सिस्टम S-400 के सौदे के बारे में IndiaFirst पहले भी अपने पाठकों को अवगत कर चूका है|

अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि भारत अमेरिका के साथ अगले दो-तीन सालों में 10 बिलियन डॉलर यानी करीं छह खरब का रक्षा सौदा करने वाला है| गौरतलब है कि ये सौदा ऐसे समय पर हो रहा है जब इन दोनों देशों के बीच व्यापार और इमीग्रेशन को लेकर तनातनी चल रही है|

इस सौदे के अंतर्गत भारत अमेरिका से लॉन्ग रेंज मेरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट पी-8आई खरीदेगा| इससे पहले भी भारत अमेरिका से यह एयरक्राफ्ट खरीद चुका है लेकिन इस बार ये एयरक्राफ्टस पिछले एयरक्राफ्टस के मुकाबले ज्यादा एडवांस होंगे|

सूत्रों के अनुसार पिछले हफ्ते ही रक्षा मंत्रालय इन एयरक्राफ्टस के खरीददरी को मंजूरी दे चूका है पर अभी रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) से मंजूरी बाकी है| डीएसी के पास मंजूरी के लिए इस प्रस्ताव को अगस्त में भेजा जायेगा जहाँ पर परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे|

क्या है एयरक्राफ्ट पी-8आई की विशेषताएं ?

सेंसर, हारपून ब्लॉक-2 मिसाइल, एमके-54 लाइट टॉरपीडो, और रॉकेट से लैस पी-8आई विमान अपने दुश्मन की सबमरीन को डिटेक्ट करके खत्म कर सकता है| साल 2009 में ही भारत ने इन विमानों के लिए सौदा किया था और इस समय भारत के पास 8 ऐसे विमान मौजूद हैं| साल 2021-22 के जुलाई तक भारत के पास चार और विमान आ जायेंगे|

वैसे तो नौसेना एक दर्जन से भी ज्यादा पी-8आई विमान खरीदना चाहती थी पर अमेरिका से 2.5 अरब डॉलर के 30 सशस्त्र सी गार्जियन (प्रीडेटर-बी) ड्रोन की खरीद के बाद 10 विमानों के लिए ही सहमति मिल पाई है|

दिल्ली की सुरक्षा के लिए NASAMS II भी

इसके अलावा 24 नेवल मल्टी-रोल एमएच60 रोमियो हेलिकॉप्टर (2.6 बिलियन डॉलर), दिल्ली के ऊपर शील्ड के लिए नेशनल एडवांस सर्वेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2 (लगभग एक बिलियन डॉलर) और छह अपाचे हेलिकॉप्टर (930 मिलियन डॉलर) के सौदे अमेरिका के साथ किए जाएंगे| साल 2007 से अब तक भारत अमेरिका के साथ 17 बिलियन डॉलर का सौदा कर चूका है| दोनों देश कई मुद्दों पर राजनीतिक साझेदारी भी कर रहे है|

आपको बताते चलें कि भारत और रूस के बीच अक्टूबर 2018 में हुए S-400 मिसाइल की समझौते से अमेरिका नाखुश था, और चाहता था की ये सौदा रद्द हो जाये जिसके लिए उसने भारत को GSP प्रणाली से बाहर करके दबाव बनाने की कोशिश भी की थी| अमेरिका के इस रुख का करारा जवाब देते हुए मोदी सरकार ने भी अमेरिका से निर्यात होने वाले वस्तुओं पर टैक्स डबल कर दिया और इस प्रकार अमेरिका के लिए उसका दाव उल्टा ही पड़ गया|

इसके बाद भारत ने मार्च 2019 में परमाणु क्षमता वाली हमलावर पनडुब्बी अकुला-1 को 10 साल के लिए पट्टे पर लेने के लिए रूस के साथ तीन अरब डॉलर का समझौता भी किया|