भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कठुवा के मंदिर समेत देश की 11 नयी धरोहरों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया

temple of Kathuwa

आर्टिकल 370 के बोझ से मुक्त हुए कश्मीर को पूरा एक हफ्ता बीत चूका है | इस एक हफ्ते में सरकार ने कश्मीर राज्य को सशक्त राज्य की पहचान देने हेतु उसके विकास कार्य के लिए कई योजनाओ का एलान किया है जिन्हें बहुत जल्द क्रियान्वित भी किया जायेगा | कश्मीर से आई ताज़ा खबर के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक मंदिर समेत अन्य 11 धरोहरों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया है |

सुत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय धरोहर घोषित होने के बाद अब इन स्मारकों की देख-रेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी | बता दे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने देश की संस्कृति और सभ्यता को सरंक्षित करने हेतु एक ही साल में कुल 11 स्मारकों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का रिकॉर्ड कायम किया है | इन 11 स्मारकों के जुड़ने के बाद अब देश में राष्ट्रीय स्मारकों की संख्या कुल 3697 हो गयी है | आइये जानते है इन नवनियुक्त राष्ट्रीय स्मारकों के बारे में |

ये स्मारक उत्तराखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल और जम्मू-कश्मीर में स्थित हैं | इन 11 नवनिर्वाचित राष्ट्रीय स्मारकों में चार मंदिर सम्मिलित है जिनमे ओडिशा के बोलंगीर स्थित रानीपुर झारियाल मंदिर समूह, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित कोटली का विष्णु मंदिर, केरल के वायनाड स्थित जनार्दन मंदिर, जम्मू कश्मीर के कठु़आ स्थित त्रिलोचननाथ मंदिर शामिल है |

खुदाई स्थल को भी घोषित किया गया राष्ट्रीय स्मारक

किसी भी खुदाई स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना आसान नहीं होता | खुदाई स्थल को राष्ट्रीय स्मारक विशेष परिस्थितियों में ही घोषित किया जाता है और इस प्रक्रिया में लम्बा समय लग जाता है | फिर भी एएसआई की टीम ने उत्तराखंड के वीरपुर खुर्द स्थित वीरभद्र ऋषिकेश खुदाई स्थल को अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2019 के बीच में ही राष्टीय स्मारक घोषित कर दिया |

सूत्रों का कहना है की 1973 से लेकर 1975 के बीच में एएसआई की तेम ने यहाँ पर खुदाई की थी जब उन्हें यहाँ पर तीन सांस्कृतिक स्थल के साक्ष्य मिले | एएसआई के मुताबिक प्रारंभिक खुदाई में एक शताब्दी से लेकर तीसरी शताब्दी तक के साक्ष्य मिले वहीँ दुसरे भाग के खुदाई में चौथी शताब्दी से लेकर पांचवी शताब्दी तक के साक्ष्य मिले | जबकि तीसरे भाग के खुदाई में सातवीं शताब्दी से लेकर आठवीं शताब्दी तक के साक्ष्य मिले | इनके अलावा इस खुदाई में शिव मंदिर के भी प्रमाण मिले | टीम का मानना है की यहाँ पर हिन्दू सभ्यता के लोग रहते होंगे |

अश्वमेघ यज्ञ स्थल राष्ट्रीय स्मारक घोषित

सन 1952 से 1954 के बीच में ASI टीम के उत्खनन में जगत नाम के एतिहासिक स्थल की खोज की गयी थी | ये स्थल विकासनगर से 6 किलोमीटर दूर कलसी के निकट बाड़वाला नामक स्थान पर एक सघन आम के बाग के बीच अदृश्य और उपेक्षित किंतु अत्यधिक महत्व वाला स्थल है | इस उत्खनन में टीम को तीन यज्ञ वेदिकाएं प्राप्त हुई जिन्हें पक्की इंटों से बनाया गया था और इनका आकर उड़ते हुए गरुड़ की तरह था |

इन वेदिकाओं के अध्ययन के बाद ये सामने आया की पहली से पांचवीं सदी के बीच वर्तमान सरसावा, हरिपुर, विकासनगर और संभवत: लाखामंडल तक युग शैल नामक एक साम्राज्य था जिसकी राजधानी हरिपुर और इस साम्राज्य को बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश द्वारा शाषित किया जाता था | इस साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण कल तीसरी शताब्दी रहा जब इस राज्य पर शील वर्मन नामक परम शक्तिशाली राजा राज करते थे | कहा जाता है की उन्होंने ने ही चार अस्वमेघ यज्ञ किया था | और उत्खनन में मिली तीन वेदिकाएं भी इसी अश्वमेघ यज्ञ की है जबकि चौथे को अभी खोजना बाकी है |