मेक इन इंडिया के तहत अपाचे जैसा हेलिकॉप्टर बनाएगा एचएएल

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मोदी सरकार लगातार अपनी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने और सेना को ताकतवर बनाने की दिशा में काम कर रही है और आगे बढ़ रही है। भारतीय सेना लगातार अपनी मारक क्षमता का विस्तार कर रही है। इसमें पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही है और सामरिक जरूरतों के मुताबिक देश में ही रक्षा विनिर्माण किया जा रहा है। इसी योजना के तहत भारत में अपाचे जैसा हेलिकॉप्टर के विनिर्माण का रास्ता खुला है।

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने वर्ष 2027 तक 10 से 12 टन के स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाने की महत्वकांक्षी और सामरिक रूप से अहम परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। एचएएल द्वारा बनाए गए हेलीकॉप्टर बोइंग के अपाचे की तरह दुनिया के बेहतरीन सैन्य हेलीकॉप्टर के टक्कर के होंगे। एचएएल के प्रबंध निदेशक आर माधवन ने कहा कि इस बड़ी योजना का उद्देश्य आने वाले सालों में करीब चार लाख करोड़ रुपए की लागत से तीनों सेनाओं के लिए किए जाने वाले हेलीकॉप्टर के आयात को रोकना है।

प्रोटोटाइप तैयार करने में 9,600 करोड़ रुपए होंगे खर्च

आर माधवन ने बताया कि एचएएल ने हेलीकॉप्टर की प्रारंभिक डिजाइन तैयार कर ली है और शुरुआती योजना के तहत कम से कम 500 हेलीकॉप्टर बनाने का लक्ष्य है और अगर सरकार इस साल मंजूरी देती है, तो हेलीकॉप्टर का पहला प्रारूप 2023 में तैयार कर लिया जाएगा। माधवन ने बताया कि हेलीकॉप्टर का डिजाइन और प्रारूप तैयार करने के लिए 9,600 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। अगर 2020 में हमें इसकी मंजूरी मिल जाती है तो हम पहला हेलीकॉप्टर 2027 तक बना लेंगे। हम इस श्रेणी के 500 हेलीकॉप्टर बनाने की योजना है। यह अहम योजना है जिस पर हम काम कर रहे हैं।

हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जा सकेगा

माधवन ने बताया कि हेलीकॉप्टर में दो इंजन होंगे और पोत पर अपनी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए हेलीकॉप्टर के ब्लेड को मोड़ने की सुविधा होगी। योजना के तहत इन हेलीकॉप्टर की हवाई हमले, परिवहन, लड़ाई के दौरान सामरिक मदद करने, दुश्मनों की तलाश और बचाव कार्यों में भूमिका होगी। हेलीकॉप्टर कई आधुनिक हथियार प्रणाली से लैस होंगे। एचएएल प्रमुख ने बताया कि हेलीकॉप्टर को निर्यात करने की असीम संभावनाएं होंगी।

उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार और सैन्य साजो सामान का आयातक है। सरकार रक्षा उत्पादन के स्वेदशीकरण का प्रयास कर रही है और इसके लिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाने सहित कई कदम उठा रही है। भारतीय वायुसेना विमान निर्माण कंपनी बोइंग से अरबों डॉलर में 22 अपाचे गार्जियन लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीद रही है। इसके अलावा थल सेना हथियारों से लैस छह अपाचे हेलीकॉप्टर खरीद रही है। इससे जुड़ा समझौता पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे में किया गया।

इसके अलावा भी कई ऐसी रक्षा परियोजनाएं हैं जिनमें पीएम मोदी की पहल पर मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। डालते हैं एक नजर-

‘Make in India’ के तहत बनाए गए बुलेट प्रूफ जैकेट

इंसास रायफल और एके 47 की गोलियों को झेलने में सक्षम बुलेट प्रूफ जैकेट का देश में उत्पादन शुरु हो गया है जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता से भी बेहतर है। इसकी गुणवत्ता अमेरिका, इंग्लैंड और जर्मनी में उत्पादित बुलेट प्रूफ जैकेट के बराबर है। जैकेट्स की कीमतों के बारे में बात करते हुए यह बताया गया कि ये जैकेट विदेश से पहले खरीदे जा रहे जैकेट की कीमत से काफी कम है, इनकी कीमत 70,000 से 80,000 रुपये है। इसे विदेश से निर्यात के आर्डर भी मिल रहे है। नई जैकेटें भारतीय सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस बलों को पूरी सुरक्षा प्रदान करेंगी।

भारतीय सुरक्षाबल नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों तथा पूर्वोत्तर में उग्रवाद का सामना लगातार कर रहे हैं। साथ ही उन्हें कश्मीर में आतंकियों से भी देश की सुरक्षा करनी है। ऐसे में उनकी बढती चुनौतियों में ये जैकेट उनका पूरा साथ निभाने में और दुश्मन की घातक गोलियों से उनकी रक्षा करने में काफी कारगर सबित हो सकता है।

मेक इन इंडिया के तहत AK-203 असॉल्ट राइफल

आतंक के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में जुटे सेना के जवानों को अब मेक इन इंडिया के तहत दुनिया के सबसे घातक हथियारों में से एक AK-203 असॉल्ट राइफल के आधुनिक संस्करण से लैस किया जायेगा। जवानो को दिया जाने वाला यह राइफल उत्तरप्रदेश के अमेठी में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड और रूस के साझा प्रयास के तहत बनाकर तैयार किया जायेगा।

सेना और सुरक्षाबलों के आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि ‘एके-203 राइफल’ उस इंसास राइफल की जगह लेगी, जिसका इस्तेमाल थल सेना और अन्य बल कर रहे हैं। इस क्रम में 7,00,000 एके-203 राइफलें तैयार करने का शुरुआती लक्ष्य है। एके-203 राइफल एके-47 राइफलों का सबसे आधुनिक संस्करण है। नई असॉल्ट राइफल भी एके-47 की तरह ऑटोमैटिक और सेमी ऑटोमैटिक दोनों ही सिस्टमों से लैस होगी। लिहाजा यह सैन्य प्रक्रिया में काफी मददगार साबित होगी।

HAL बना रहा स्वार्म ड्रोन

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) वायुसेना की कार्य कुशलता और कॉम्बैट ऑपरेशन को बेहतर तरीके से बिना नुकसान अंजाम देने के लिए एक स्वार्म ड्रोन बना रहा है। बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप न्यू स्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज, के साथ संयुक्त रूप से HAL द्वारा बनाया गया ये ड्रोन वायुसेना की मारक क्षमता में कई गुना इजाफ़ा करेगा। इस ड्रोन का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है। इसमें लगने वाली अधिकतर तकनीक और कॉम्पोनेन्ट देश में ही विकसित किये जा रहे हैं।

भारत के अलावा अमेरिका, चीन, रुस और कुछ यूरोपीय देश भी ऐसे ड्रोन्स तैयार करने की जुगत में लगे हैं। अभी तक कोई भी देश पूर्णतया अपने इस लक्ष्य में कामयाब नहीं हो पाया है। स्वार्म ड्रोन्स भारत सरकार के कॉम्बेट एयर टीमिंग सिस्टम प्रोजेक्ट (CATS) का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत स्वार्म ड्रोन के साथ ही इनकी लॉन्चिंग के लिए एक रोबोटिक विंगमैन भी डेवलेप किया जाएगा।

 


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