मोदी विरोधी खुद करे तुष्टिकरण की सियासत और मोदी को बदनाम करें 

कहते है कि जिनके घर शीशे के होते है वो दूसरों के घरों में पत्थर नहीं मारते लेकिन देश की सियासत में देखा जाये तो जो पार्टी सालों से सियासत में तुष्टिकरण करती आई है वो मोदी सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाती है जो एक मजाक से कम नही महसूस होता है।

राजस्थान में रामनवमी के मौके पर लगाई गई 144 धारा

कोरोना की वजह से 2 साल से जहां देश में त्योहारों को मनाने में रोक लगी ती तो इस बार कोरोना ना होने के चलते देश में नवरात्र की धूम दिख रही थी और लोग जोश के साथ रामनवमी और हनुमान जयंती मनाने की तैयारी कर रहे है। ऐसे में लेकिन राजस्थान के लोगों को अब मायूस होना होगा। क्योकि वहां कि सरकार ने अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू करने का फरमान जारी किया गया है। फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई है। अब इसे तुष्टिकरण का नाम दिया जाए या नही ये तो आप खुद समझ गये होगे। क्योकि दूसरी तरफ सरकार ने रमजान के मुस्लिम इलाको में बिजली 24 घंटे देने की बात कही है। वही करौली में हुआ दंगा भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाता है कि आखिर कहां खामी रही कि दो समुदाय में विवाद पैदा हो गया। जबकि दूसरी तरफ यूपी को देखा जाये तो वहां होलिका दहन और शबेरात एक ही दिन पड़ने के बाद भी समूचे प्रदेश में कोई भी वारदात नहीं हुई।

मोदी सरकार सबका कर रही विकास

दूसरी तरफ मोदी सरकार है जो लगातार अपनी योजना से सभी धर्म और मजहब को आगे ले जा रही है और किसी भी योजना में तुष्टिकरण नही करती जिससे देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। जो सरकार के संकल्प सबका साथ सबका विश्वास सबका विकास को पूरा कर रहा फिर वो उज्जवला योजना हो, आयुष्मान योजना हो, पीएम आवास योजना हो या हर घर जल पहुंचाना हो, सरकार मजहब के नाम को देखकर नही करती।

मोदी सरकार के विरोधी इसके बाद भी तुष्टिकरण का तमगा मोदी सरकार पर लगाकर एक समुदाय को डरा कर अपनी सियासत चमकाना चाहते है। ऐसे में नये भारत में अब इस सियासत को भी खत्म करना होगा।