भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का एक और वार, CBIC से 22 अधिकारी जबरन रिटायर

Another attack of Modi government on corruption

भ्रष्टाचार पर अपने कड़े रुख को जारी रखते हुए मोदी सरकार ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज ऐंड कस्टम्स से 22 अधिकारियों को रिटायर करने का फैसला किया है| भ्रष्टाचार पर नो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए मोदी सरकार सरकारी विभागों में व्यापक सफाई अभियान चला रही है और नाकारा और दागी अफसरों को जबरन रिटायर कर रही है| इस से पहले भी सरकार ने टैक्स विभाग से 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायर किया था|

उल्लेखनीय है कि देश की पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही जून महीने में कई बड़े अधिकारियों को रिटायर किया था| डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के इन अफसरों को समय से पहले ही रिटायरमेंट देने का फैसला सरकार ने किया है|

सेंट्रल सिविल सर्विसेज 1972 का नियम 56(J) सरकार को ये अधिकार देता है कि वो 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र सीमा तक पहुंच चुके अधिकारियों की सेवा समाप्त कर सकती है| इस नियम के अंतर्गत जून में विभाग से बाहर का रास्ता दिखाए गए ये अफसर इनकम टैक्स विभाग में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात थे| इनके खिलाफ भ्रष्टाचार, और आय से अधिक अवैध संपत्ति होने जैसे गंभीर आरोप थे|

मोदी सरकार सभी विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाने हेतु न सिर्फ भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर सख्त है, बल्कि ख़राब प्रदर्शन करने वाले अधिकारी भी सरकार के घेरे में हैं| मूलतः सरकार युवा और सक्षम अधिकारियों को मौका दे कर सरकारी विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है| केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य निगरानी समिति की मदद से सरकार सभी भ्रष्ट कर्मियों पर पुख्ता नजर रख रही है और उनके प्रदर्शन की नियमित समय पर विवेचना करके आगे का निर्णय ले रही है|