कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख करोड़ का ऐलान, डेयरी, पशुपालन का रखा गया विशेष ध्यान

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आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत मोदी सरकार ने आज इसकी तीसरी किस्त की घोषणा की। इसबार की घोषणा में सरकार ने सबसे ज्यादा ध्यान ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर दिया है। कृषि,फिशरीज,डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और कृषि संबंधी अन्य कामकाज को लेकर राहत  पैकेज की घोषणा की गई।क्या रहा आज खास चलिये हम बताते हैं।

कृषि सेक्टर से जुड़े लोगों के दिनों में आयेगी बहार

वैसे तो लॉकडाउन और कोरोना संकट के चलते सरकार ने किसानों को पहले ही कई तरह की योजनाओं से मदद पहुंचाई है जिससे उन लोगों की फसल खराब होने पर उनपर आर्थिक बोझ न पड़े और नई फसल लगाने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े लेकिन इसके बाद भी आत्मनिर्भर भारत पैकेज की तीसरी बार घोषणा करते हुए सरकार ने किसानों के लिये खास कदम उठाये हैं। जिसके चलते कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ का ऐलान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि अपने देश में कृषि उत्पादों के लिए भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। उचित भंडारण नहीं होने के कारण अनाज को काफी नुकसान पहुंचता है।इसलिये केवल भंडारण व्यवस्था को ठीक करने के लिये सरकार एक लाख करोड़ रूपये खर्च करेगी। जिससे सामान खराब न हो सके। ऐसे ही सरकार ने ऑपरेशन ग्रीन के तहत टोमैटो,अनियन और पौटैटो यानी TOP स्कीम का विस्तार कर TOTAL कर दिया है और सभी फल और सब्जियों को शामिल किया गया है। इसके लिए 500 करोड़ की घोषणा की गई है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान किसानों के लिए तमाम उपाय किए गए हैं। इस दौरान MSP खरीदारी के जरिए किसानों के हाथों में 74,300 करोड़ रुपये दिए गए। पीएम किसान योजना के तहत उनके खाते में 18,700 करोड़ रुपये जमा किए गए। पीएम फसल बीमा योजना के तहत 6400 करोड़ रुपये के दावों की पूर्ति की गई। इतना ही नही देश में हर्बल खेती को बढ़ाने के लिये 4 हजार करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है। अगले दो सालों में 10 लाख हेक्टेयर में हर्बल खेती का लक्ष्य भी रखा गया है। गंगा किनारे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। हर्बल खेती से किसानों को 5000 करोड़ की इनकम होने का कयास भी लगाया जा रहा है।

फिशरीज,डेयरी, फूड प्रोसेसिंग को बढ़ाने पर बल

अगर देखा जाये तो ये वो सेक्टर है जो सबसे ज्यादा कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के शिकार बने है। फिशरीज की बात करके तो लॉकडाउन में इसका काम करने वालो को बहुत बड़ा घाटा उठाना पड़ा है। वही दूध उत्पादन वालों के सामने भी कई तरह की मुश्किलों का दौर इस वक्त चल रहा है। जिसको देखते हुए सरकार ने इनके उत्थान के लिये विशेष पैकेज का ऐलान किया है। लॉकडाउन के दौरान दूध की मांग में 20-25 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने डेयरी को-ऑपरेटिव को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2020-21 में ब्याज दर पर सालाना 2 फीसदी राहत देने का फैसला किया है। इस स्कीम के जरिए 5000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी आएगी और 2 करोड़ किसानों को फायदा पहुंचेगा इसी तरह मछली पालन को बूस्ट देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 20 हजार करोड़ रुपये के प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को लॉन्च किया जाएगा। इस कदम से 55 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा और 1 लाख करोड़ रुपये का दोहरा निर्यात होगा। इसी तरह से दो लाख मधुमक्खी पालनकर्ताओं को लाभान्वित और महिलाओं के क्षमता निर्माण पर विशेष जोर देने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन के लिए 5,00 करोड़ की स्कीम लाई जाएगी।

 

माइक्रो फूड एंट्रप्राइजेज को पटरी पर लाने की कोशिश

मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन में सबसे ज्यादा जोर अगर किसी बात पर दिया गया है तो वो है लोकल फॉर वोकल और इसी को आगे ले जाने के लिये माइक्रो फ्रूड एंट्रप्राइजेज का पहिया देश में तेजी से दौड़ना चाहिये जिसके लिये सरकार ने इस सेक्टर को 10 हजार करोड़ रूपये का बूस्ट दिया है जिससे ये सेक्टर तेजी से आगे बढ़ सके। इसके साथ साथ अन-ऑर्गनाइज्ड माइक्रो फूड एंट्रप्राइजेज  को टेक्निकली अपडेट करने की जरूरत है जिससे उन्हें FSSI से मंजूरी मिल सके। इस स्कीम से करीब 2 लाख MFE को लाभ मिलेगा।

यही नही सरकार ने अपने बड़े ऐलान में मवेशी पालन करने वालों के लिये भी खास सहूलियत दी है। सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपये का एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट फंड की घोषणा की है तो वही  पालतू मवेशी के मुंह में घाव होनी की बीमारी को दूर करने के लिए टीकाकरण करने का ऐलान किया है  नैशनल ऐनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम का बजट 13,343 करोड़ रुपये होगा। इस प्रोग्राम के तहत 53 करोड़ जानवरों को वैक्सीन दी जाएगी जिसमें 1.5 करोड़ गाय-भैंस शामिल होंगे।

 

बहरहाल सरकार ने तीन पैकेज की घोषणा कर दी है। पहला पैकेज करीब 6 लाख करोड़ और दूसरा पैकेज करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये का था। पुरानी घोषणाओं और रिजर्व बैंक की तरफ से उठाए गए कदमों को मिलाकर अब तक कुल 16.45 लाख करोड़ की घोषणा हो चुकी है। महापैकेज में अब 3.55 लाख करोड़ रुपये बकाया है। और ये किस सेक्टर को मिलेगा ये तो आने वाले वक्त में ही पता चल पायेगा।


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