LOC पर बम ब्लास्ट में पैर खोने के बाद आनंदन गुणासेकरन ने मिलिट्री गेम्स में लगाई गोल्ड की हैट्रिक

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Subedar Anandan Gunasekaran wins gold hat-trick in military games

जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं। इस कहावत को सेना में सूबेदार आनंदन गुणासेकरन ने सच कर दिखाया है।

चाइना के वुहान में खेले जा रहे 7वें मिलिट्री गेम्स में भारत के आनंदन गुनासेकरन ने 100, 200 और 400 मीटर स्पेर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर गोल्ड हैट्रिक लगाकर देश का झंडा बुलंद किया है। मद्रास सेपर्स के इस सूबेदार की कहानी लोगों के लिए काफी प्रेरणादाई हैं। आनंदन 2005 में भारतीय आर्मी के साथ जुड़े थे, जहां 2008 में जम्मू और कश्मीर में LOC के पास वायर फेंसिंग के लिए रूटीन चेकिंग के दौरान हुए माइन ब्लास्ट में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा, जिसने गुणासेकरन की पूरी जिंदगी बदल दी। लेकिन उन्होंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और अपने जांबाज हौंसले के दम पर वह पैरा खेल में आ गए।

गुनासेकरन ने बताया की जहां हम चेकिंग कर रहे थे, वह इलाका माइन फील्ड नहीं था,लेकिन शायद मेरी ही किस्मत खराब थी। हादसे के बाद उन्हें पहले श्रीनगर के अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें पुणे रेफर किया गया। वहीं उनके पैर का ऑपरेशन हुआ, जिसमें घुटने के नीचे के हिस्से को काटना पड़ा। उन्होंने अपने साथ हुए इस हादसे के बारे में 6 महीने तक घरवालों को नहीं बताया। जब घर पहुंचे तो मां ने दोबारा ड्यूटी पर जाने से मना कर दिया। गुणासेकरन ने मां की नजर बचाते हुए घर से भागकर ड्यूटी ज्वाइन की।

उन्होंने मन में ठान लिया था की ऐसे ही जिंदगी नहीं काटनी, इसलिए उन्होंने रनिंग करने की सोची। उन्होंने पैरालंपिक खेलों के बारे में जानकारी हासिल की और 2012 में लकड़ी के प्रोसथेटिक पैर की मदद से 2.5 किमी का रास्ता 9.58 मिनट में तय किया। इसके बाद उन्होंने अपने सीनियर्स से प्रोसथेटिक ब्लेड की डिमांड की। इसके बाद ही उनके एथलेटिक सफर की शुरुआत हुई।

कर चुके हैं कई पदक अपने नाम

ये पहली दफा नहीं है जब आनंदन ने ऐसा कोई बड़ा कारनामा किया हो। इससे पहले आनंदन एशियन पैरा गेम्स में भी भारत के लिए रजत और कांस्य पदक जीत चुके हैं। जकार्ता में हुए 2018 एशियन पैरा गेम्स में आनंदन ने 400 मीटर और 200 मीटर के T44/T62/64 कैटेगिरी में ये पदक जीते थे। इसके अलावा आनंदन ने 2017 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी 400 मीटर में गोल्ड जीता था। जबकि IPC एथलेटिक्स एशिया-ओशियाना चैंपियनशिप के 200 मीटर इवेंट में भी उन्हें रजत पदक हासिल हुआ था।

कई देशों के सैन‍िक लेते है भाग

ये पहली बार है जब चाइना को मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की मेज़बानी का मौक़ा मिला है, साथ ही साथ चाइना में होने वाली ये अब तक की सबसे बड़ी सैन्य प्रतियोगिता है। जिसमें 140 देशों के क़रीब 10 हज़ार एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और कुल 27 खेलों में पदक की होड़ लगी है। इस खेल का आयोजन चाइना के मिलिट्री स्पोर्ट्स कमिशन द्वारा हो रहा है, अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ के तत्वाधान में चल रहा है।

पैरालंपिक गेम्स पर है नजर

2012 में आनंदन लकड़ी के पैर के साथ 100 और 200 मीटर की दौड़ में अपने करियर का आग़ाज़ किया। जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर 2016 में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया है। आनंदन की नज़र अब 2020 पैरालंपिक्स में भारत का नाम रोशन करने पर है।

अपने सफर पर गुनासेकरन ने कहा कि हर इंसान के लिए जरूरी है कि वह कभी मुश्किल हालातों में हिम्मत नहीं हारे। जिंदगी में मेरा लक्ष्य है कि जब भी मैं गिरुं खुद को संभालूं और फिर खड़ा होकर दौड़ना शुरू करूं।

 


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