दिल्ली हिंसा: साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल, शिव मंदिर की रखवाली करता रहा मुस्लिम युवक

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एक तरफ तमाम न्यूज चैनल में सिर्फ दिल्ली जलने की खबर आ रही है, तो वहीँ दूसरी तरफ आपसी भाईचारे की खबरे भी है, जो ये बता रही है कि नफरत कितनी भी असरदार हो पर मोहब्बत पर हमेशा हल्की ही पड़ती है। दिल्ली हिंसा के बीच कुछ ऐसी खबरें बता रही है की अभी भी साम्प्रदायिक सौहार्द खत्तम नहीं हुई है।

नागरिकता संशोधन एक्ट के नाम पर दिल्ली में हुई हिंसा अब भले ही थम गई है, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर अभी भी दहशत का माहौल है, इसी बीच ऐसी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं जहां लोगों ने अमन-चैन के लिए भी अपनी जान दांव पर लगा दी।

दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 42 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 200 लोग घायल हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभी तक इस हिंसा में 48 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसी बीच दिल्ली में ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं जो साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए मिसाल बन गईं।

शकील ने चमन पार्क स्थित शिव मंदिर को बचाया

दरअसल, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा की आग में जल रही थी तब एक मुस्लिम युवक ने तिहारा के चमन पार्क स्थित शिव मंदिर (Shiv Mandir) को बचाया। इस शख्स का नाम शकील अहमद है। बीते 25 फरवरी को जब यहां हिंसा हो रही थी तो उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर शिव मंदिर की रक्षा की और उपद्रवियों को इसके आस-पास भी नहीं आने दिया।

यह घटना 25 फरवरी के रात की है, शिव विहार के चमन पार्क चौराहे पर स्थित मंदिर पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया। इसके बाद वहीं रहने वाले शकील ने स्थानीय लोगों की मदद से मोर्चा संभाला।

शकील ने बताया कि उपद्रवी तोड़फोड़ के इरादे से उनके क्षेत्र तिहारा में आए, तो वहां के कुछ लोग मस्जिद की तरफ बढ़ गये तो कुछ मंदिर की हिफाजत में लग गये। उन्होंने कहा, ‘उपद्रवी पहले मस्जिद की ओर बढ़ रहे थे लेकिन हमने ना ही उन्हें मस्जिद की ओर जाने दिया और ना ही शिव मंदिर की ओर।’

’72 घंटों से नहीं सोए’

शकील ने आगे बताया कि इस घटना को 72 घंटे से भी ज्यादा हो गये हैं लेकिन हमारी आंख अभी भी नहीं लगी है। घटना वाले दिन उपद्रवी अपने साथ हथियार लेकर आए थे लेकिन हमें अपने मंदिर और मस्जिद दोनों को को बचाना जरूरी था।

राम सेवक से मुस्लिम भाइयों ने कहा- आराम से सो जाइए

वहीं, शिव विहार निवासी राम सेवक ने कहा, ‘मैं यहां पिछले 35 साल से रह रहा हूं। इस इलाके में सिर्फ एक या दो ही हिंदू परिवार रहते हैं, लेकिन हमे कभी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। हिंसा के समय मेरे मुस्लिम भाइयों ने मुझसे कहा कि अंकल जी, आप आराम से सो जाइए। आपको कोई नुकसान नहीं होगा।’

 


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