माही के अलविदा कहने से क्रिकेट का एक युग हुआ खत्म

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

अंतहीन अटकलों को विराम देते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफलतम कप्तान रहे और सर्वश्रेष्ठ फिनिशर महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। कैप्टन कूल के यूं संन्यास लेने से भारतीय क्रिकेट का एक युग खत्म हो गया, ये कहना गलत नही होगा।

अब नही दिखेगा हेलीकॉप्टर शॉट

माही जिस तरह मैदान में अपने फैसलों से विपक्षी टीमों यहां तक कि अपनी टीम के सदस्यों को चौंकाते थे‚ ठीक उसी तरह अपने संन्यास का निर्णय लेकर उन्होंने समस्त खेल जगत को स्तब्ध कर दिया। वैसे पिछले एक साल से उनके भविष्य को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही थी‚ मगर 15 अगस्त की शाम को आईपीएल की फ्रेंचाइजी टीम चेन्नई सुपर किंग्स की प्रैक्टिस से आने के बाद उन्होंने सारी कयासबाजी पर पूर्ण विराम लगा दिया। एक शायरी के जरिए माही ने क्रिकेट को अलविदा किया। सूझबूझ भरी कप्तानी और मैच को अंजाम तक ले जाने की कला के साथ भारतीय क्रिकेट के इतिहास के कई सुनहरे अध्याय लिखने वाले धोनी के इस फैसले के साथ ही क्रिकेट के एक युग का भी अंत हो गया। क्योंकि अब हमे वो हेलीकॉप्टर शॉट देखने को नही मिलने वाले जिन्हे देखने के लिए हम टीवी से चिपके रहते थे और माही माही चिल्लाते रहते थे।

कैप्टन कूल ने दिलाये भारत को बड़े बड़े खिताब

भारतीय क्रिकेट टीम में आक्रामकता लाने का श्रेय अगर सौरव गांगुली को जाता है तो चुपचाप और बेहद ठंडे़ दिमाग से जीत की रणनीति बनाने का श्रेय निश्चित तौर पर धोनी के हिस्से आता है। इस मामले में उनकी तुलना ऑस्ट्रेलिया के महानतम खिलाड़़ी स्टीव वॉ से की जा सकती है। वॉ भी मैदान में शांति और चपलता से अपनी चमक बिखेरते थे। सफलता मिलने के बावजूद अपने पैर जमीं पर रखना और असफलता को सफलता की कुंजी बनाने का माद्दा गिने–चुने और विरले लोगों को आता है। धोनी उन्हीं में से थे। निश्चित रूप से धोनी की कमी खलेगी और दर्शकों को लंबा वक्त इससे उबरने में लगेगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16 साल दे चुके धोनी ने टेस्ट से दिसम्बर 2015 में ही सन्यास ले लिया था। उन्होंने 2019 वर्ल्ड़ कप में न्यूजीलैंड़ के खिलाफ आखिरी मैच खेला था। माही की कामयाबी की बात करें तो माही ने भारत को क्रिकेट की तीनो फार्मेट में विश्व विजेता का खिताब दिलाया था। इसके साथ साथ दुनिया का कोई भी ऐसा कोना नही है जहां भारत को जीत का स्वाद नही चखाया हो।

बहरहाल नीली जर्सी में न सही क्रिकेट के दीवाने उन्हें पीली जर्सी में देखकर जरूर रोमांचित होंगे। जोखिम भरे फैसले लेने वाला और हारी हुई बाजी को जीतने वाला शायद ही कोई दूसरा धोनी पैदा होगा। नवोदित खिलाडि़यों को उनसे काफी कुछ सीखने की जरूरत है। इसके साथ साथ हम तो यही बोलेंगे कि धोनी वो नाम है जो कभी भूला ना जा सके। इसके साथ साथ जीवन की दूसरी पारी में वो सफल हो इसकी कामना हम करते हैं।


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •