कोरोना संकट के बीच मॉनसून की हर बूँद से बुझेगी मंदी की प्यास ?

तकरीबन 2 महीने से ज्यादा वक्त, देश हो या दुनिया हर तरफ सिर्फ कोरोना माहामारी के बढ़ते कहर की ही खबर सुनाई दे रही है और अभी भी ये खबरे थम नही रही हैं। कुछ अच्छी खबर सुनने के लिये मानो जैसे कान तरस गये हो लेकिन कोई खबर मिल ही नही रही थी लेकिन इन सब आफत के बीच देशवासियों के लिये एक अच्छी खबर ये आई है कि इस बार मॉनसून बेहतर रहने वाला है। जिससे कयास लगाये जा रहे हैं कि कोरोना से आर्थिक जगत पर जो मार पड़ी है वो कम हो सकती है।

अर्थव्यवस्था की मंदी को दूर करेगा मॉनसून?

वैसे तो भारतीय मौसम विज्ञान की तरफ से अभी ये नही बोला गया है कि केरल में मॉनसून ने दस्तक दे दी है। लेकिन मौसम एजेंसी स्काईमेट ने देश में मॉनसून के दस्तक देने का ऐलान कर दिया है। स्काईमेट की माने तो इसबार मॉनसून ने 1 जून की जगह 30 मई को ही दस्तक दे दी है। जो शुभ संकेत बताये जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही इस साल के लिए मॉनसून सीजन में 100 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया है और ऐसा माना जाता है कि इसमें 5 प्रतिशत कमी या इजाफा मुमकिन हो सकता है। पिछले साल 8 जून को मॉनसून ने केरल तट पर दस्तक दी थी लेकिन इस बार 30 मई को ही उसका आगमन हो चुका है अच्छा मॉनसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था पहले ही सुस्ती से जूझ रही है। ऊपर से कोरोना वायरस के कहर ने भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर ही तोड़ दी है। अब मॉनसून की झमाझम बारिश देश में मंदी की मार को दूर करेगी।

बारिश की हर बूंद आर्थिक हालात को देगी बल

भारत कृषि प्रधान देश है लिहाजा मानसून सामान्य रहने से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होता है। भारत में ज्यादातर किसान खरीफ की फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर होते हैं। अच्छे मॉनसून से फसलों की पैदावार बढ़ती है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ती है अगर अच्छा मॉनसून रहता है तो ग्रामीण भारत में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है। लोग खरीदारी करते हैं। भारतीय इकॉनमी के लिए मॉनसून की अहमियत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिस साल यह अच्छा नहीं होता उस साल बाइक और ऑटो कंपनियों की बिक्री तक प्रभावित हो जाती है। ऐसे में अब आप समझ सकते हैं कि मॉनसून के बेहतर रहने की खबर से ही आर्थिक जगत के जानकारो की बाँछें खिल गई है।

जून से सितंबर तक भारत में रहता है मॉनसून

अमूमन भारत में मॉनसून जून से लेकर सितंबर तक यानी की 4 महीने रहता है और सबसे पहले जून में ये दक्षिण भारत के इलाको में पहुंचता है।  जिसके बाद ये दूसरे राज्यों में आता है। ऐसा माना जाता है कि केरल में अगर मॉनसून ठीक वक्त पर पहुंच गया है तो जून के अंत तक ये उत्तर भारत तक पहुंच जायेगा। जिससे होने वाली फसल को पानी मिलने की आपार संभावनाए हो जाती है जो देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाता है।

मतलब साफ है कि इस बार केवल किसानों को ही नही बल्कि समूचे देशवासियो को मॉनसून का इंतजार है क्योंकि इस बार का ये मॉनसून देश की आर्थिक व्यवस्था को ठीक करके 135 करोड़ भारतीयो के चेहरे में खुशी लायेगा। ऐसे में कठिन दौर में मॉनसून के ठीक वक्त पर आने की खबर बिलकुल पॉवर एनर्जी के टानिक की तरह ही है।