अमेरिकी तेलों के भाव माइनस मे जाने का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर

कच्चे तेल के भावों मे कोरोना के कारण भरी गिरावट देखने को मिल रही है | इसका सबसे अच्छा उदाहरण अमेरिकी तेल के भाव की गिरावट है | अमेरिकी तेल का भाव गिरकर माइनस 37.63 डॉलर प्रति बैरल हो गया है | यह गिरावट काफी भयावह है तथा ये आने वाले समय मे गिरती अर्थव्यवस्था का प्रतिक है | आइये जानते हैं इसके और क्या मायने हो सकते हैं :- 

अमेरिकी क्रूड के भाव में गिरावट क्यों?

क्रूड का भाव सप्लाई, डिमांड और क्वालिटी जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। कोविड-19 की वजह से लोग घरों में हैं। ऐसे में तेल की मांग घट गई है और बाजार में मांग से ज्यादा सप्लाई हो गई। ओवरसप्लाई की वजह से स्टोरेज कैपिसिटी भी फुल हो गई है।

अमेरिकी उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?

ऑयल प्राइस इन्फॉर्मेशन सर्विसेज के एनालिस्ट टॉम क्लोजा का कहना है कि क्रूड फ्यूचर्स की कीमतों में गिरावट का असर पेट्रोल पंपों पर दिखे, यह जरूरी नहीं। मई में पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों में कमी आएगी लेकिन, यह नहीं सोचना चाहिए कि क्रूड का भाव निगेटिव हो गया है तो पेट्रोल-डीजल गिफ्ट में मिल जाएगा। लेकिन, मौजूदा कीमतों के हिसाब से अमेरिकी परिवारों को हर महीने तेल की खरीद पर 150 से 175 डॉलर की बचत होगी।

एयरलाइंस के लिए क्या मायने?

क्रूड का रेट गिरने से एयरलाइंस के लिए उड़ानों का संचालन सस्ता हो जाएगा। वैसे ज्यादातर उड़ानें अभी खाली हैं क्योंकि, कोविड-19 की वजह से लोग यात्रा नहीं कर रहे।

ऑयल इकोनॉमी पर क्या असर होगा?

सामान्य हालातों में ग्लोबल डिमांड का 30% क्रूड पिछले दो से तीन हफ्ते में दुनियाभर में स्टोर हो चुका है लेकिन, अब डिमांड नहीं है। अगर क्रूड की मांग कोविड-19 से पहले के स्तरों पर भी पहुंचती है तो भी पूरे स्टोरेज को खपाने में लंबा वक्त लग जाएगा। एनर्जी सेक्टर के विश्लेषकों का कहना है कि जल्द मांग लौटने की उम्मीद नहीं है। कारोबारियों के मन में आने वाले समय में भी क्रूड की डिमांड में कमी की आशंका बनी हुई है।

भारत पर क्या असर होगा?

भारत तेल उत्पादक देशों के संगठन यानी ओपेक ब्लॉक से क्रूड इंपोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें घटने से भारत में तेल सस्ता होगा लेकिन, यह तुरंत और उतने ही अनुपात में नहीं होगा। क्योंकि, डॉलर के मुकाबले रुपए में पिछले दिनों से लगातार कमजोरी बनी हुई है। भारत क्रूड इंपोर्ट का भुगतान डॉलर में करता है। इसलिए, रुपए के मुकाबले डॉलर महंगा होने भारत के लिए इंपोर्ट महंगा होगा। दूसरा यह कि भारत ब्रेंट क्रूड आयात करता है। मौजूदा स्थिति में डब्ल्यूटीआई के मुकाबले ब्रेंट क्रूड के भाव में स्थिरता है। आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट आती भी है तो सरकार द्वारा उपभोक्तायों को ज्यादा फायदा देने की उम्मीद नहीं है |