कोरोना पर वार, अमेरिका करे मंत्रोच्चार

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वैसे तो भारतीय सभ्यता और इसकी ताकत से विश्व पहले ही अवगत थी लेकिन कोरोना काल में एक बार फिर भारतीय संस्कृति कोरोना से जंग का बड़ा हथियार बन ही है। तभी तो नमस्ते के बाद अब मंत्रो उच्चारण भी विदेश में सुने जा रहे हैं।

 

भारतीय संस्कृति का लोहा विश्व मान रही है

ये देखकर अच्छा लग रहा है कि एक बार फिर विश्व भारत के दिखाये रास्ते पर चलने लगा है। वैसे युगों से देखा जा रहा है कि विश्व भारतीय संस्कृति से ही सीखती आई है। फिर वो चिकत्सा का क्षेत्र हो या फिर रक्षा का क्षेत्र क्यों न हो भारत के  ग्रंथों में बताये गये मंत्रों या उपनिदेशों से ही ज्ञान प्राप्त करके इन्हें नये कलेवर में पेश किया गया है लेकिन आज एक बार फिर भारत को गुरू मानकर भारत के दिखाये रास्ते पर चलने की शुरूआत हो गई है। खासकर कोरोना से निपटने के लिए इसिलिए तो समाजिक दूरी बनाकर एक दूसरे का अभिवादन का तरीका नमस्ते आज पूरे विश्व ने अपना लिया है तो अमेरिका में खुद व्हाइट हाउस में शांति पाठ के स्वर गूंजने से ये पता चल रहा है कि आध्यात्म की ताकत को विश्व पहचान रहा है। तभी दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान ट्रंप भी शांति पाठ को पूरे ध्यान से सुन रहे हैं। क्योंकि उनका भी विश्वास जुड़ा है कि ऐसा करने से जरूर इस विपदा से राहत मिल सकती है।

भारतीय परंपरा को अंगीकार करता विश्व

ऐसा नहीं है कि पहली बार ऐसा हुआ है पहले भी भारत की संस्कृति और ज्ञान के क़ायल पश्चिम के देश देखे गये हैं। फिर वो अमेरिका में ही स्वामी विवेकानंद का भाषण हो या फिर यूएन से पीएम मोदी द्वारा योगा की ताकत से विश्व को अवगत करवाना हो। हर बार विश्व ने भारत के ज्ञान को माना भी है और उसके दिखाये रास्ते पर चला भी है।


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