मसूद पर बैन के लिए अमेरिका, फ्रांस व ब्रिटेन की नयी कोशिशें


• चीन मसूद अजहर को आतंकी नहीं मानता और उइगर उसे आतंकी नजर आते हैं
• फ्रांस और ब्रिटेन के सहयोग से अमेरिका ने फिर एक बार अजहर को आतंकी घोषित करने का यूएन में प्रस्ताव दिया

जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड और पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के चीफ मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर से कोशिशें तेज हो गयी है| 27 मार्च 2019 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने एक मसौदा प्रस्ताव भेजा जिसमे पाकिस्तान स्थित जैश-ऐ-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर बैन लगाने की बात कही गयी है| इस प्रस्ताव को लेकर ख़ास बात यह है कि अमेरिका के इस प्रस्‍ताव का फ्रांस और ब्रिटेन ने समर्थन भी कर दिया है।

हालाँकि यह कोई पहली बार नहीं है जब जैश-ऐ-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर बैन लगाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव आया है| लेकिन ख़ास बात यह है कि इस दफा अमेरिका ने यह प्रस्‍ताव संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्‍यीय काउंसिल को दिया है। इस सन्दर्भ में एक राजनयिक ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन के साथ 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है. प्रस्ताव में मसूद अजहर की यात्रा पर बैन, संपत्ति जब्त, और हथियार बंदी की बात कही गई है|

मालूम हो कि इस बात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि इस मसौदा प्रस्ताव पर मतदान कब होगा| ये मुमकिन है कि चीन इस मसले पर पहले की ही तरह ही वीटो का उपयोग कर सकता है| परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, और अमेरिका के साथ चीन भी शामिल है| यही वजह है कि चीन द्वारा वीटो के उपयोग करने के अंदेशा को भांपते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चीन की आंतरिक नीतियों और हिंसक इस्लामिक आतंकी समूहों पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है|

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने इस सन्दर्भ में कहा है कि चीन अपने यहाँ लाखों मुसलमानों को प्रताड़ित करता है, लेकिन वीटो का सहारा लेकर हिंसक इस्लामिक आतंकी समूहों को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध से बचाता है। जैश-ए-मोहम्‍मद या मसूद अजहर का बिना नाम लिए पॉम्पियो ने ट्वीट कर कहा कि, “दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती। एक तरफ चीन अपने यहाँ 10 लाख से अधिक मुसलमानों को प्रताड़ित करता है, जबकि दूसरी तरफ वो हिंसक इस्लामिक आतंकी समूहों को यूएन के प्रतिबंध से बचाता है।”

यह अलग बात है कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन यह स्पष्ट है कि उनका इशारा जैश-ए-मोहम्मद और उसके चीफ मसूद अजहर की तरफ था। चूँकि अभी दो सप्ताह पहले ही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने से बचाने के लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया था। उस वक़्त भी अमेरिका ने चीन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि आतंकियों को संरक्षण देने की आपकी नीति में परिवर्तन नहीं आता है तो सुरक्षा परिषद के सदस्य देश इसके अलावा सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे|

मालूम हो कि इससे पहले 20 मार्च को यूरोपियन यूनियन में मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित कराने के लिए जर्मनी ने प्रस्ताव पेश किया था। जबकि कुछ ही दिनों पहले फ्रांस ने भी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर की सभी फ्रांसीसी सम्पत्तियों को ज़ब्त करने का फैसला किया था। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर के मसले पर सभी देशो की एकजुटता इस बात को दर्शाती है कि चीन आतंकवाद से जुड़े इन मसले पर खुद की ही नीति को लेकर पुरे विश्व में अलग-थलग पड़ चूका है|