कोरोना वैक्सीन से पेटेंट हटाने को राजी हुआ अमेरिका, भारत को होगा इससे फायदा

कोरोना माहामारी के बीच भारत दुनिया को अपनी ताकत का एहसास भी दिलाने में लगा है जिसके चलते अमेरिका ने वैक्सीन पेटेंट के दावे को छोड़ा दिया है जिसका स्वागत सभी देश कर रहे है। ऐसा करने से भारत को क्या फायदा होगा चलिये हम आपको बताते है।

प्रस्ताव को मंजूरी के बाद क्या होगा फायदा

सरकार की माने तो इस कदम से कोविड-19 टीके और आवश्यक चिकित्सा उत्पादों के उत्पादन की गति को बढ़ाने व समय पर इनकी उपलब्धता को सक्षम करने के लिए पहले से बेहतर काम होगा। भारत की माने तो अमेरिका का समर्थन मिलने के बाद डब्ल्यूटीओ में इस छूट को जल्द ही मंजूरी दी जा सकती है जिससे उत्पादन का रास्ता खुल जायेगा और भारत सहित कई देशों में मेडिकल सामान बनने का रास्ता भी साफ हो जायेगा जिससे कोविड से तेजी से जंग लड़ी जा सकती है। गौरतलब है कि 26 अप्रैल को फोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को डब्ल्यूटीओ में भारत की इस पहल के बारे में जानकारी दी, जिसका उद्देश्य मानवता का लाभ है।

भारत के प्रस्ताव को 120 से ज्यादा देशों का समर्थन

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बयान की माने तो अमेरिका से पहले वैश्विक स्वास्थ्य संकट और कोविड-19 महामारी से निपटने की जरूरत को देखते हुए भारत और दक्षिण अफ्रीका ने 2 अक्टूबर 2020 को विश्व व्यापार संगठन में एक प्रस्ताव पेश किया था। इसमें कहा गया है कि विकासशील देशों के लिए टीकों और दवाओं की त्वरित व सस्ती पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ट्रिप्स पर समझौते के मानदंडों में छूट दी जाए। भारत और अन्य समान सोच वाले देशों द्वारा सक्रिय प्रयासों के परिणामस्वरूप इस प्रस्ताव को 120 से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त हुआ है जो ये बताता है कि भारत अगर कोई बात दुनिया के सामने रखता है तो उसे अब सुना ही नही जाता बल्कि उसपर समर्थन भी मिलता है।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी इसी तरह का समर्थन भारत को मिला है तो आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत के साथ आज विश्व खड़ा है जो भारत की ताकत का एहसास करवा रही है कि कैसे आज भारत लगातार विश्व में अपनी पहचान बना रहा है।