अमरनाथ यात्रा 2019 – पिछले साल के 60 दिन का रिकॉर्ड इस साल 22वें दिन ही टुटा

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Amarnath Yatra 2019

पवित्र अमरनाथ यात्रा अभी जारी है| सरकार द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम और श्रद्धालुओं के उत्साह के चलते इस बार इस पवित्र यात्रा के लिए रिकॉर्ड संख्या में यात्री आये हैं| हालाँकि बीते कुछ समय से पडोसी देश और आतंकवाद से हुए तनातनी में कयास लग रहे थे कि हो सकता है सरकार इस साल की अमरनाथ यात्रा का आयोजन रोक दे| पर ऐसा नहीं हुआ, और कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ सरकार ने 45 दिवसीय इस धार्मिक यात्रा की शुरुवात की| अचम्भे की बात है कि अभी इस यात्रा के मात्र 22 दिन ही पुरे हुए हैं और श्रद्धालुओं का आंकड़ा 2.50 लाख के पार पहुँच गया है|

अमरनाथ यात्रा के 22वे दिन कुल 13,377 यात्रियों ने पवित्र गुफा के दर्शन किये, और इसके साथ ही यात्रा के 22वे दिन बाबा बर्फानी के दर्शनार्थियों की संख्या 2,85,381 के पार पहुँच गयी और पिछले साल की यात्रा के 60 दिनों का रिकॉर्ड भी टूट गया|

पिछले साल क्या थे श्रद्धालुओं के आंकडे

सूत्रों ने बताया की बीते वर्ष 2018 में 60 दिन की अमरनाथ यात्रा में बाबा बर्फानी के दर्शनार्थियों की संख्या 2,85,006 रही जो इस साल के 22 दिन के आंकड़ों से भी कम है|

दो मार्गों से होती है यात्रा

बाबा के भक्तों के अनुसार अमरनाथ गुफा में बर्फ की जो विशाल संरचना बनती है वो भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों की प्रतीक है| गुफा तक जाने के दो रास्ते हैं, पहला 14 किलोमीटर लम्बा बालटाल मार्ग और दूसरा 45 किलोमीटर लम्बा पहलगाम मार्ग| जो श्रद्धालु बालटाल मार्ग से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते है वे दर्शन करने वाले दिन ही आधार शिविर पर लौट आते हैं| दोनों ही शिविरों पर श्रधालुओं के लिए हेलीकाप्टर की भी व्यवस्था की गयी है|

हालाँकि अब तक कुल 24 श्रद्धालु इस यात्रा पर अपनी अंतिम साँसे ले चुके हैं, परन्तु इसका कारन आतंकव नहीं है| एसएसबी की जानकारी के अनुसार अब तक 22 श्रधालुओं की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, जबकि दो लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई है|

क्या है बाबा अमरनाथ की कहानी

भक्तों का मानना है कि सन 1850 में एक मुस्लिम चरवाहे बूटा मलिक द्वारा इस पवित्र गुफा की खोज की गयी थी| और लोगों के अनुसार एक सूफी ने बूटा को कोयले से भरी एक बोरी दी थी जो बाद में सोने से भरे बोरे में बदल गया| बस तभी से बाबा बर्फानी को चढ़ाये गए भेंट में से कुछ हिस्सा चरवाहे और उसके वंशजों को को दिया जाता है| यह परम्परा पिछले 150 सालों से चलती आ रही है|

बता दे की इस साल की अमरनाथ यात्रा पुरे 45 दिन तक चलेगी और आने वाले 15 अगस्त को श्रावण मास की पूर्णिमा के साथ ही ख़त्म हो जाएगी|

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •