पाकिस्तान सहित दुनिया के कई बड़े देशों का है भारत के आम चुनाव पर नजर

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देश में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई बड़े देशो की नजर टिकी हुई है| अमूमन भारत के आम चुनाव पर दुनिया की नजर टिकी ही होती है| लेकिन इनमे से कुछ देश ऐसे है जो भारत में होने वाले चुनाव पर विशेष तौर पर निगाह बनाये हुए है|

भारत में होने वाले आम चुनाव पर नजर रखने के पीछे कई सारी वजहें है| इन कई सारी वजहों में से अगर सबसे मुख्य वजह को ढूंढा जाए तो बढ़ता हुआ भारतीय बाजार ही नजर आता है, जिसे सभी देश अपनी तरफ खीचना चाहते है| बहरहाल, जब हमने कुछ ऐसे देशो के बारे में बात की जिनकी निगाहें विशेष तौर पर भारत के चुनाव पर बनी होती, तो ऐसे में यह सवाल लाजमी है की आखिर दुसरे देश को भारत में होने वाले चुनावो में क्या दिलचस्पी होगी? लेकिन दिलचस्प है, वो क्यों है और वो कौन से देश है आइये उनके बारे में विस्तार से जानते है:

पाकिस्तान

वो देश जिनकी निगाहें भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव पर विशेष तौर से है, उनमे से सबसे ख़ास है पाकिस्तान| यूँ तो भारत के सभी पडोसी देशो की निगाहें भारत में होने वाली लोकसभा चुनाव पर टिकी है| लेकिन इन पड़ोसी  देशो में पाकिस्तान की दिलचस्पी भारत में होने वाले चुनाव को लेकर कुछ ज्यादा ही है| इस सन्दर्भ में खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस बात की तसदीक कर चुके है|

मालूम हो कि पिछले कुछ समय से भारत और पाकिस्‍तान के बीच संबंधों में गिरावट के बावजूद दोनों देशों के बीच वर्ष 2016-17 में भारत ने पाकिस्‍तान के साथ करीब 1821 मिलियन यूएस डॉलर का निर्यात किया था जबकि इसी दौरान पाकिस्‍तान से करीब 454 मिलियन यूएस डॉलर का सामान आयात किया गया था। ये आंकड़े इस लिहाज से भी बेहद अहम् है कि उसी साल सितंबर 2016 में जैश ए मुहम्‍मद के आतंकियों ने भारतीय सेना के कैंप पर हमले को अंजाम दिया था। जिसमे 19 जवान शहीद हो गए थे। हालाँकि हमले के बाद दोनों देशो के बीच सम्बन्ध के स्तर तो गिरे लेकिन इसके बावजूद भी व्‍यापार बादस्‍तूर जारी रहा था।

लिहाजा एक तस्वीर जो साफ़ है वो ये कि दोनों ही देश एक दूसरे के बाजार को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। इससे पहले साल 2006 से लेकर साल 2017 के दौरान 2013-14 में दोनों देशों के बीच सर्वाधिक व्‍यापार हुआ था। इस दौरान भारत ने 2274 मिलियन यूएस डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया था, जबकि पाकिस्तान से 427 मिलियन यूएस डॉलर का इंपोर्ट किया गया था। भारत ने इस दौरान कॉटन, ऑर्गेनिक केमिकल, प्‍लास्टिक की चीजें, डाई, रंगाई के सामाना, तेल, न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर, बॉयलर से जुडे सामान, मशीन, फल, दालें, मेडिकल प्‍लांट्स, चीनी, फार्मासूटिकल्‍स प्रोडेक्‍ट्स कॉफी, चाय, रबड़ आदि का व्‍यापार किया था। इस मामले से जुड़ी सबसे ख़ास बात तो यह है कि भारत ने पुलवामा आतंकी हमले से पहले तक पाकिस्तान को मोस्‍ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया हुआ था। जिसके तहत पाकिस्तान को व्यापार में कई तरह की रियायतें भी दी जाती थी|

अबकी बार

दरअसल, आने वाले समय में भारत में किसकी सरकार बनेगी इस बात पर भविष्‍य की नीतियां भी तय होती हैं। यह नीतियां न सिर्फ व्‍यापार के मद्देनजर होती हैं बल्कि रणनीतिक भी होती हैं। क्‍योंकि हम दोनों पड़ोसी मुल्‍क हैं इसलिए हमारे यहां की सुख, शांति और समृद्धि से कहीं न कहीं हमारे पड़ोसी मुल्‍क भी पूरी तरह से प्रभावित होते हैं। यही वजह है की पाकिस्तान की निगाहें भारत में होने वालो लोकसभा चुनाव पर टिकी हुई है| इसके अलावा पाकिस्तान की निगाह भारत में होने वाले आम चुनाव पर इस वजह से भी टिकी हुई है क्योंकि वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर लगातार सवाल उठता रहा है, चाहे वो आतंक का मसला रहा हो या फिर कश्मीर का| पाकिस्तान की निगाहें इसलिए भी टिकी है चूँकि पिछले चार सालो में उसे उसके हर कुकृत्यो का मुहतोड़ जवाब दिया गया है|

चीन

चीन का भारत के लोकसभा चुनावों पर नजर होने की वजह है भारत और चीन के बीच करीब 4056 किमी की सीमा एक दूसरे से मिलना| मालूम हो कि यह सीमा जम्‍मू कश्‍मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक है। हालाँकि इसके बीच में तीन अन्‍य राज्‍य भी आते हैं। जिसमे चीन के साथ कई अन्य जगहों पर भारत का सीमा विवाद भी है। इसी क्रम में अक्‍साई चिन भी ऐसा ही हिस्‍सा है, जिस पर चीन ने अवैध रूप से कब्‍जा किया हुआ है। इसके अलावा समय-समय पर चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्‍सा बताता रहा है।

एक वजह धर्म गुरू दलाई लामा को भारत में शरण देने से भी जुड़ा है, बताया जाता है कि चीन इस बातो को लेकर काफी खफा है। वहीं बीतें पांच वर्षों के दौरान डोकलाम विवाद ने दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव को काफी बढ़ा दिया था। हालाँकि यह विवाद करीब दो माह से भी अधिक समय तक चला था। लेकिन फिर भी इन सब चीजो के बावजूद दोनों देशों के बीच हुए व्‍यापार को एक नई दिशा मिली थी। मालूम हो कि साल 2018 में दोनों ही देशों के बीच 2017 के मुकाबले अधिक व्‍यापार हुआ था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत ने चीन को 18.1584 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात किया था जो वर्ष 2017 के मुकाबले करीब 15.2 फीसद अधिक था। पिछले दिनों चीन में एक बैठक के दौरान वाणिज्‍य सचिव अनूप वाधवन ने इस आंकड़े को पेश किया था।

उपरोक्त बातों और चीन का भारत के चुनाव पर निगाह होने की वजहों का निष्कर्ष निकला जाए तो एक मुख्य वजह जो सामने आती है, वो है भारत का बढ़ता बाजार| चीन भी इस बात को बखूबी जानता है कि भारत का बढ़ता बाजार उसके लिए कोहिनूर हीरे के समान है| इस बात का साक्षात गवाह भारतीय बाजारों में मिलने वाले चीनी उत्पाद ही है| लिहाजा चीन उस भारत से अपने रिश्ते को ठीक ही रखना चाहता है जिसे वर्ल्‍ड बैंक ने उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था करार दिया है| ऐसे में एक तस्वीर जो साफ़ है वो यह कि, भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव इस प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करेगा| हालाँकि इसके अलावा सीमा विवाद समेत अन्य कई फैक्टर भी मौजूद है| लेकिन यह मसला चीन का भारत के चुनाव पर निगाह होने की मुख्य वजह है|

अमेरिका

अमेरिका के लिए भारत किस कदर मायने रखता है यह बात पिछले साढ़े चार सालो में उभर कर सामने आयी है| इस दौरान दोनों देश ने न केवल रणनीतिक बल्कि व्यापारिक समेत कई अन्य क्षेत्र में भी साझेदारी बखूबी निभाई है| पिछले ही दिनों अमेरिका ने भारत को रक्षा सौदे के तहत चार चिनूक हेलीकॉप्‍टर भी सौंपे हैं। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में दोनों देशो के बीच रक्षा क्षेत्र में हुए कई अहम समझौते जमीन पर दिखायेंगे।

जहाँ एक तरफ अमेरिका पहले पाकिस्तान से काफी करीबी था| अब वही अमेरिका चीन से उसके कई मुद्दों पर 36 का आंकड़ा रखता है। एक नहीं ऐसे कई मामले है जो यह दर्शाता है की इन सालो के बीच भारत और अमेरिका के बीच सम्बन्ध काफी अच्छे हुए है| हालांकि भारत और अमेरिका के बीच अभी भी विवाद कम नहीं हैं। पेरिस समझौते में अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ बयानबाजी, अमेरिका द्वारा छेड़े गए ट्रेड वार में भारत के शामिल होने जैसे कई मुद्दे है जिसका प्रभाव दोनों देशो के व्यापारिक संबंधो पर पड़े है| लिहाजा यह इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के बीच वर्ष 2018 में व्‍यापारिक घाटे में करीब डेढ़ बिलियन यूएस डॉलर से अधिक का इजाफा हुआ है। जो साल 2017 के मुकाबले करीब सात फीसद ज्यादा है। हालाँकि इन सब चीजो के बावजूद भी दोनों देश लगातार व्‍यापार को बढ़ाने की बात कर रहे हैं। जिसकी वजह काफी स्पष्ट है| भारत का बाजार, चूँकि अमेरिका को अपने यहाँ उत्पादित सामानों को ख़त्म करने के लिए भारतीय बाजार का सहयोग लेना ही पड़ेगा| और ये सहयोग आने वाली सरकार के दूसरे देशों के साथ होने वाले व्‍यापार की दिशा और दशा पर निर्भर है| ऐसे में तीनो ही देश भारत में होने वालो लोकसभा चुनाव से नजर नहीं हटा सकते|