नये कश्मीर में आलम ये है कि 31 साल से बंद मंदिर का खुला ताला

जन्नत से तुलना कश्मीर की की जाती है और मोदी राज में कश्मीर सही मायने में जन्नत बनता भी जा रहा है। तभी तो वहां विकास की नई नई गाथा लिखी जा रही है तो दूसरी तरफ वहां पर सालों से बंद मंदिर के कपाट भी बिना किसी खौफ के खुलने लगे हैं।

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31 साल बाद खुले कश्मीर में मंदिर के कपाट

कश्मीर घाटी में हालात काफी हद तक बदल गए हैं और श्रीनगर का शीतलनाथ मंदिर इसकी गवाही दे रहा है। यह मंदिर 31 साल की लंबी अवधि के बाद फिर से खोल दिया गया है। बसंत पंचमी के मौके पर यहां विशेष पूजा भी आयोजित की गई। दरअसल, घाटी में आतंकवाद की शुरुआत और हिंदू विरोधी माहौल बनने के बाद से यह मंदिर बंद था। अब जब हालात सामान्य हो गए हैं, तो हब्बा कदल इलाके में स्थित इस मंदिर को फिर से भक्तों के लिए खोल दिया गया है जो ये बताता हैकि धारा 370 हटने के बाद किस तरह से कश्मीर में अमन कायम हुआ है। इसके साथ साथ विकास के कामों की लंबी फेहरिस्त है जो बीते 6 सालो में देखे जा रहे है। रोड व्यवस्था घाटी के गांव गांव पहुंच रहा है तो बिजली भी कश्मीर के हर गांव तक पहुंचा दी गई है, फिर वो सीमा से जुड़े गांव हो या फिर दूर दराज के पहड़ों में बसे गांव ही क्यों न हो।

विदेशी प्रतिनिधिमंडल दोबारा से पहुंचा कश्मीर

धारा 370 हटने के बाद विश्व के देश फिर से एक बार कश्मीर के माहौल का जायजा लेने भारत आ पहुंचे है। इस प्रतिनिधिमंडल में 24 देशों के सदस्‍य हैं जो कश्मीर में हए विकास कार्यों को देखेंगे वैसे इस दौर से पाकिस्तान ज्यादा खुश नजर नही आ रहा है। क्योकि वो जानता है कि विश्व के सामने उसकी एक बार फिर पोल खुलेगी कि वो कश्मीर को लेकर झूठ ही विश्व के सामने परोस रहा है। वैसे कश्मीर के मुद्दे पर भारत आज पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है क्योकि अमेरिका रूस और ब्रिटेन के साथ साथ दुनिया के ज्यादातर देश भारत के साथ खड़े है और इसे भारत का ही आंतरिक मामला बताते है। खासकर अब तो मुस्लिम देश यूएई भी भारत के साथ खड़ा हुआ दिख रहा है जिससे भारत की साख और अधिक मजबूत हुई है।

फिलहाल आजादी के बाद कश्मीर में जितना काम अब हो रहा है वो पहले किसी सरकार में नही हुआ तो दूसरी तरफ आंतक का नामुनिशान अब कश्मीर से मिट रहा है। रोजगार के अवसर पैदा हो रहे है। जो ये बताता है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और हमेशा भारत का ही रहेगा।