अजित डोभाल ने कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज करने के दिए निर्देश

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Ajit Doval gave instructions to speed up operations against terrorists in Kashmir

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर में हालात जल्द पूरी तरह सामान्य बनाने के लिए आतंकी व राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिये अभियान तेज करने के निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों के जान-माल-सम्मान की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए भी कहा। डोभाल ने सुरक्षा एजेंसियों को आगाह किया कि आतंक विरोधी अभियानों के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए नागरिकों अथवा उनकी संपत्तियों को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने यह निर्देश उस रिपोर्ट के बाद दिए जिसमें बताया गया था कि आतंवादी नागरिकों और सेब उत्पादकों में भय पैदा कर नागरिक कर्फ्यू लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। बता दे की पांच अगस्त के बाद डोभाल का यह दूसरा कश्मीर दौरा है। इससे पहले वह पिछले माह करीब 11 दिन कानून व्यवस्था के मद्देनजर कश्मीर में रहे थे।

डोभाल ने यह निर्देश कश्मीर में अलगाववादियों व आतंकियों द्वारा जबरन लागू कराए जा रहे बंद को नाकाम करने की रणनीति का जायजा लेते हुए दिए।

27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कश्मीर मुद्दा उछालने की आशंका से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कश्मीर दौरा बहुत अहम माना जा रहा है। यह दौरा उस समय हुआ है, जब सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर समेत वादी के विभिन्न हिस्सों में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के सहयोग से आतंकी हमले की साजिश का अलर्ट जारी कर रखा है।

डोभाल ने कश्मीर में सक्रिय आतंकियों, आतंकी संगठनों में नए लड़कों की भर्ती और घुसपैठ के प्रयासों से निपटने के लिए सुनियोजित अभियान चलाने के लिए भी कहा। उन्होंने एलओसी पर जारी गतिविधियों का भी जायजा लिया। उन्होंने राज्य में निकट भविष्य में होने वाले ब्लॉक विकास परिषदों के चुनाव और एहतियातन हिरासत में लिए गए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई से संबंधित मामलों पर भी विचार विमर्श किया है।

गौरतलब है की 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भाषण होना है। दोनों नेताओं के भाषण कश्मीर पर ही केंद्रित रहेंगे और इनका असर कश्मीर में जरूर होगा। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है और मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार कोई चूक नहीं चाहेगी और इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खुद कश्मीर में हालात को सामान्य बनाए रखने की रणनीति को अंतिम रूप देने यहां आए थे।

 


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