अफगानिस्तान से भारतीयों को लेकर स्वदेश लौटा वायुसेना का विमान

अफगानिस्तान  में जारी हिंसक हालात के बीच भारतीय अधिकारियों को लेकर काबुल से रवाना हुआ भारतीय वायुसेना का विमान गुजरात के जामनगर में लैंड हो चुका है। इसके साथ साथ अफगान में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को बाहर निकालने के लिए सरकार योजना बना रही है। 

130 भारतीयों को काबुल से भारत लाया गया

भारत सरकार ने एक बार फिर से दिखा दिया कि अपने तो अपने होते हैं तभी तो अफगान में तालिबानी हुकूमत के आते ही जैसे ही भारतीयों पर संकट के बादल छाये वैसे ही भारत सरकार ने अपने लोगों को बचाने के लिये मुहिम छेड़ दिया। वायुसेना को इसके लिए बकायादा कमान भी सरकार ने सौंपी और तुरंत भारत से C-17  प्लेन को अफगानिस्तान भेजा गया। जहां 130 भारतीयों को लेकर वो गुजरात के जामनगर पहुंच चुका है। भारतीय अधिकारियों को सोमवार शाम को काबुल एयरपोर्ट के सुरक्षित इलाकों में ले जाया गया था। यहां पर ये भारतीय वायुसेना के विमान का इंतजार कर रहे थे। अफगानिस्तान में अभी भी कई भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जो स्वदेश वापसी की राह देख रहे हैं। फिलहाल वे हिंसा वाले इलाकों से दूर सुरक्षित स्थानों पर हैं। माना जा रहा है कि एक या 2 दिनों के भीतर उनकी भी स्वदेश वापसी होगी। सरकार इसके लिए एक विशेष विमान को भेज सकती है। वहीं, सरकार ने अभी तक अफगानिस्तान में फंसे हुए नागरिकों की संख्या की जानकारी नहीं दी है। इसके पीछे की वजह सुरक्षा कारण है।

C-17 विमान ने लगभग 140 भारतीय अधिकारियों के साथ काबुल से भरी उड़ान

अफगानिस्तान सेल’ का गठन किया गया

इससे पहले रविवार की रात भी भारतीय वायुसेना का एक विमान काबुल पहुंचा था। इस दौरान इसने कुछ भारतीय नागरिकों को लेकर स्वदेश के लिए उड़ान भरी और सोमवार सुबह भारत में लैंड हुआ था। इस तरह एक बार फिर भारतीय वायुसेना भारतीयों के लिए रक्षक साबित हो रही है भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह अफगानिस्तान में बिगड़ते हालातों के बीच अपने नागरिकों की सुरक्षा करेगी। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के अफगानिस्तान से भारत लौटने समेत दूसरे मामलों के लिए एक विशेष ‘अफगानिस्तान सेल’ का गठन किया है। लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के लिए एक मोबाइल नंबर और एक ईमेल आईडी भी जारी की गई है।

अफगानिस्तान में तुरंत समाप्त हो हिंसा

वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने सोमवार को अफगानिस्तान में शत्रुता और हिंसा को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसी भी स्वीकृति और वैधता के लिए एक ऐसा राजनीतिक समझौता होना चाहिए जो महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का पूरी तरह से सम्मान करे। तिरुमूर्ति ने कहा कि ब्रीफिंग में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की टिप्पणी ‘अत्यंत महत्वपूर्ण है और परिषद के सदस्यों को इसे स्वीकार करने की आवश्यकता है।’

अफगान के हालात पर भारत पूरी तरह से नजर बनाये हुए है और धीरे धीरे वहां फंसे भारतीयों को अपनी कूटनीति के जरिये बचाने में भी लगी हुई है।