2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य: Global Potato Conclave में बोले पीएम मोदी

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गुजरात के गांधीनगर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 जनवरी 2020 को तीसरे ग्लोबल पॉटेटो कॉन्क्लेव को रिमोट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा 21वीं शताब्दी में भी कोई भूखा और कुपोषित न रहे, इसकी भी एक बड़ी जिम्मेदारी आप सभी के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में खेती के तमाम प्रयासों में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए सरकार का फोकस खेत से लेकर फूड प्रोसेसिंग और डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर तक एक आधुनिक और व्यापक नेटवर्क खड़ा करने का है।

किसान और उपभोक्ता के बीच के बिचौलियों और उपज की बर्बादी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए परंपरागत कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि खेती की लागत कम हो, जिससे कृषि कार्यों में किसान का खर्च कम हो। सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से, किसानों के अनेक छोटे खर्चों को पूरा करने में मदद मिली है। अब तक 8 करोड़ किसानों को इसका लाभ दिया जा चुका है। इस महीने के शुरुआत में, एक साथ 6 करोड़ किसानों के बैंक खातों में, 12 हजार करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर करके एक नया रिकॉर्ड भी बनाया गया है। साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर तेज़ी से कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों के प्रयास और सरकार की पॉलिसी के कॉम्बिनेशन का ही परिणाम है कि अनेक अनाजों और दूसरे खाने के सामान के उत्पादन में भारत दुनिया के टॉप-3 देशों में है।

क्यों होता है इस कार्यक्रम का आयोजन

इस कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक दस साल के अंतराल पर आलू के क्षेत्र में उपलब्धियों पर कार्य करना और अगले दशक के लिए रोडमैप तैयार किया जाता है। बीते दो दशकों के दौरान 1999 और 2008 में दो वैश्विक आलू सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कॉन्क्लेव के द्वारा सभी हितधाराकों को एक साझा मंच प्रदान किया जाता है, जिससे सभी विषयों पर चर्चा की जा सके और भविष्य की योजनाओं में आलू क्षेत्र से संबंधित सभी को शामिल किया जा सके।

सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य

देश में गुजरात आलू के प्रमुख उत्पादकों में से एक है। बीते ग्यारह वर्षो में देश में आलू के क्षेत्र में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें से गुजरात में लगभग 170 प्रतिशत (2006-07 में 49.7 हजार हेक्टेयर, 2017-18 में 13.3 हजार हेक्टेयर) बढ़त दर्ज की गयी है। पिछले एक दशक में 30 टन / हेक्टेयर से अधिक की उत्पादकता के साथ गुजरात भारत में प्रथम स्थान पर रहा है। गुजरात देश के प्रमुख आलू प्रसंस्करण उद्योगों का केंद्र है यह खेती के लिए आधुनिक विधियों के साथ स्प्रिंकलर और ड्रिप इरिगेशन का प्रयोग करता है। गुजरात के ये प्रयोग बीते 5 वर्ष में पूरे देश के लिए भी किए गए हैं। साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर सरकार लगातार आगे बढ़ रही है और बहुत कुछ Achieve भी कर रही है।

देश का आलू हब- गुजरात

इस बार Potato Conclave दिल्ली से बाहर, हजारों आलू किसानों के बीच गुजरात में हो रहा है। गुजरात में इस कॉन्क्लेव का होना इसलिए भी अहम है क्योंकि, ये राज्य Potato की Productivity के लिहाज़ से देश का पहले नंबर का राज्य है। इस कॉन्क्लेव का आयोजन भारतीय आलू संघ (इंडियन पोटैटो एसोसिएशन) द्वारा इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च, नई दिल्ली और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च – केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला और अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र, लीमा, पेरू के सहयोग से किया जा रहा है। गुजरात में आलू सम्मेलन का आयोजन 28-30 जनवरी, 2020 के दौरान 3 दिनों के लिए किया जाएगा।

खेती से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी बात

गौरतलब है कि इस सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में पौध रोपण सामग्री, आपूर्ति श्रृंखला की कमी, खेती के बाद होने वाले नुकसान, निर्यात और विविध उपयोग और आवश्यपक नीतिगत सहायता – यानी लंबी दूरी के परिवहन, निर्यात संवर्धन के लिए उत्पारदन और प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल शामिल हैं।

 


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