2000 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाले अग्नि-2 बैलिस्टिक मिसाइल का रात के समय में सफल परीक्षण

Agni-2 ballistic missile successfully tested at night

अपनी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने और सेना को ताकतवर बनाने की दिशा में देश ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले प्रक्षेपास्त्र अग्नि-2 बैलिस्टिक मिसाइल का शनिवार को पहली बार रात्रिकालीन परीक्षण किया गया।

ओडिशा के बालासोर में भारत ने अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ाते हुए मध्यम दूरी के परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-2 का रात के समय सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इसकी मारक क्षमता 2000 किलोमीटर है। लेकिन माना जा रहा है की जरूरत पड़ने पर इसकी मारक क्षमता 2000 से बढ़ाकर 3000 किमी तक किया जा सकता है।

इसका परीक्षण ओडिशा के तट से स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड द्वारा किया गया। सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की परमाणु सक्षम अग्नि 2 मिसाइल का पहला रात्रि परीक्षण डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। भारत ने पिछले साल ओडिशा तट के अब्दुल कलाम द्वीप से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी तक मार करने वाली अग्नि-2 मिसाइल का परीक्षण किया था। इस बार इसका पहली बार रात में परीक्षण किया गया है।

अग्नि-2 मिसाइल का विकास एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेट्री (एएसएल) ने किया और इसे समाकलित करने का काम हैदराबाद की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने किया। अग्नि-2 डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई अग्नि सीरीज की मिसाइलों का हिस्सा है, जिसमें अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-3 (3000 किमी), अग्नि-4 (4000 किमी) और अग्नि-5 (5000 किमी से अधिक) शामिल हैं. अग्नि- 5 का परीक्षण 10 दिसंबर 2018 को इसी बेस से किया गया था और वह सफल रहा था।

अग्नि को इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत डिजाइन किया गया है। सटीक निशाने पर जाकर काम करने के लिए इसमें हाई-एक्यूरेसी नेविगेशन सिस्टम का प्रयोग किया गया है। अब रात्रिकालीन सफल परीक्षण के बाद अग्नि-2 ने एक नई कामयाबी हासिल की है।

अग्नि-2 की विशेषताएं

• 20 मीटर लंबी अग्नि 2 बैलिस्टिक मिसाइल का वजन 17 टन है।
• अग्नि-2 एक हजार किलो का आयुध 2000 किमी की दूरी तक ले जा सकती है।
• सटीक निशाने पर पहुंचने के लिए हाईएक्युरेसी नेविगेशन सिस्टम।
• मारक क्षमता को दो हजार से बढ़ाकर तीन हजार किमी तक किया जा सकता है।

गौरतलब है कि बैलेस्टिक मिसाइल उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब ऑर्बिटल बैलेस्टिक पथ होता है। इसका उपयोग किसी हथियार (नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिए किया जाता है। यह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक स्तर पर ही गाइड की जाती है।