आर्टिकल 370 खत्म करने के फैसले के बाद लोगों ने बनाया शाह को हिंदुत्व का लौह पुरुष

Amit and PM modi

अमित शाह जिन्हें हम खासतौर पर भाजपा के चाणक्य के नाम से भी जानते है, राजनीति के गलियारों में आये दिन चर्चा में रहते है | उनकी इस लोकप्रियता की वजह भी कोई ऐसी वैसी नहीं है, वो तो राजनीती में अपने दमदार व्यक्तित्व के लिए प्रचलित है | बीते सोमवार को राज्यसभा में जिस प्रकार शाह ने अपने बोल्ड अंदाज़ में आर्टिकल 370 ख़त्म करने वाले प्रस्ताव को पेश किया और साथ ही कहा जिसे भी इस बिल से परेशानी है वो मुझसे सीधा सवाल करे, उनका ये अंदाज़ देश की जनता के दिल में जैसे घर कर गया हो | भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अब हर कोई शाह को नए लौह पुरुष के तौर पर देख रही है |

Home minister of Indiaअगर शाह की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की जाती है तो ये गलत नहीं होगा | मोदी ने जब भी किसी मुद्दे की जिम्मेदारी शाह को दी, शाह ने उसे बखूबी पूरा किया है | चाहे चुनाव जीतने की रणनीति हो या यूपी में 50 फीसदी से अधिक वोटों को अपने पाले में करना या बंगाल में भगवा लहराना शाह हमेशा ही अपनी नीतियों के साथ भाजपा के लिए डट कर खड़े रहे है |

गृह मंत्री का फ़र्ज़ भी बखूबी निभा रहे शाह

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शाह भाजपा के अध्यक्ष थे | और अपने पार्टी को लोकसभा चुनाव में बम्पर वोट से जीत  हासिल करवाने में बहुत बड़ा हाथ है | चुनाव जीतने की रणनीतियां बनाने में माहिर है शाह | मोदी सरकार के पहले पांच साल में शाह ने पूरा देश घूमकर लोगों की नब्ज पकड़ी, जो चुनावी रणनीति बनाने में काम आई और भाजपा बहुमत के साथ एक बार फिर सरकार बना पाई | सरकार के दुसरे कार्यकाल में शाह ने गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली है और अपने कर्तव्यों को बखूबी पूरा कर रहे है |

नियुक्तियों में शाह और मोदी की सहमति जरूरी

सुत्रों का कहना है की चाहे सरकार में फैसले की बात हो या पार्टी में फैसले की बात हो, दोनों ही मामलों में मोदी और शाह, दोनों की सहमति जरूरी मानी जाती है | इसके साथ ही सूत्रों से ये भी सामने आ रहा है की अब क्योंकि कश्मीर आर्टिकल 370 की बीमारी से मुक्त हो गया है तो कयास ऐसे भी लगाये जा रहे है कि गृह मंत्री या प्रधानमंत्री 15 अगस्त को इस बार श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहरा सकते हैं | हालाँकि किसी भी भाजपाई नेता ने इस बात को लेकर कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है |

विपक्षी भी जानते है शाह के पास है हर सवाल का जवाब

जब भी सदन में कोई प्रस्ताव पेश किया गया है विपक्षियों ने जमकर उसका विरोध किया है पर शाह ने हमेशा यही कहा है की विरोध न करे जो भी प्रश्न या जो भी परेशानी है पूछे, आपके हर सवाल के जवाब दिए जायेंगे | शाह के इसी अंदाज़ से अवगत हर विपक्षी को पता है की शाह के नीतियों से जीतने अब असंभव सा हो गया है | उनकी निति ऐसी होती है की सदन में बहुमत न होने पर भी वो विधेयको को बहुमत के साथ पारित करवा लेते है |

विपक्षी नेताओं के बागी होने के पीछे भी है शाह की नीति

शाह की नीतियाँ विपक्षी नेताओं को भी भा रही है तभी तो एक-एक कर के वो अपनी पार्टियों से इस्तीफा दे रहे है | सोमवार को जब तीन तलाक बिल पेश किया गया तो उसके पहले ही कांग्रेस के एक सांसद ने इस्तीफा दे दिया और तो और कांग्रेस के कई सांसद सदन से गायब दिखे | एक तरफ जहाँ विपक्षी दल अपने बागी नेताओं से परेशान वहीँ दूसरी तरफ शाह बिलकुल बेपरवाह रहते है जैसे उन्हें तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता |