लॉकडाउन के बाद नये कलेवर में होगी शिक्षा व्यवस्था

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कुछ जगह से लॉकडाउन हटा लिया गया है तो अभी कुछ जगह लॉकडाउन जारी है। लेकिन ये माना जा रहा है कि जब देश से पूरी तरह से लॉकडाउन हट जायेगा तो देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बदली हुई नजर आयेगी। आगे क्या क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं, चलिये इस पर कुछ नजर डालते हैं।

समाजिक दूरी पर विशेष ध्यान

जिस तरह सरकार ने साफ कर दिया है कि कोरोना का जबतक वैक्सीन नही सामने आता है तब तक इसे पूरी तरह से खत्म मान लेना समझदारी नही होगी। लेकिन हां इससे बचने के लिये कुछ एहतियात बरतना जरूरी है अगर ऐसा करते हैं तो इसकी हद से हम बाहर रह सकते हैं। जिसका नजारा स्कूल कॉलेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है। खुद पीएम मोदी ने इसके लिये एक बैठक की और स्कूल में बच्चो को किस तरह से समाजिक दूरी, स्वच्छता का ज्ञान करवाया जाये इसके लिए रणनीति तैयार की गई है। जिसे आने वाले दिनो में साफ तौर पर देखा जायेगा।

नई शिक्षा नीति पर जोर

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि अब देश को एक नई शिक्षा नीति की जरूरत है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण 1986 में किया गया था और 1992 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे. इसके बाद तीन दशक गुजर गए हैं, लेकिन इसमें कुछ बदलाव नहीं किया गया है। बैठक में कहा गया कि इसे ध्यान में रखते हुए अब नई शिक्षा नीति की जरूरत है।

प्राथमिक शिक्षा में बदलाव

इमारत तभी मजबूत होती है जब इमारत की नीव मजबूत हो इसीलिये नई शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये शुरूआती क्लास में बड़े बदलाव किये जाएंगे। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा में एकरूपता लाई जानी चाहिए। सरकार का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है इसलिए एक नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क तैयार किया जाना चाहिए। इस फ्रेमवर्क में बहु-भाषाई ज्ञान, 21वीं सदी के कौशल, पाठ्यक्रम में खेल, कला और वातारण से जुड़े मुद्दे भी शामिल किए जाएंगे।

तकनीक के इस्तेमाल

पढ़ाई के दौरान आने वाले दिनों में तकनीक का इस्तेमाल खूब देखने को मिलेगा इसके लिये सरकार विशेष पैकेज की भी तैयारी कर रही है। जिससे बच्चों को ज्ञान के साथ तकनीक का ज्ञान भी मिल सके। इसे बढ़ावा देने के लिए स्कूल और उच्च स्तर पर इसे बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया गया। इस दौरान इस पर भी  बात हुई कि ऑनलाइन माध्यमों, टीवी चैनल, रेडियो, पॉडकास्ट का इस्तेमाल अध्ययन को सुगम, सरल और रोचक बनाने के लिए किया जाए। वही ऑनलाइन पढ़ाई का खाका भी खीचा गया।

मतलब साफ है कि कोरोना संकट के बाहर निकलने के बाद हमारे देश की पढ़ाई का तरीका  बिलकुल नये कलेवर में होगा। जिससे आने वाले दिनो में ऐसे युवा मिलेंगे जो देश को नये आयाम बनाने में विश्व में सबसे आगे रखेंगे।


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