आजादी के बाद, पहली बार भारत-अमेरिका की दोस्ती में दिखी इतनी धार

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत दौरा ट्रंप के लिए एक यादगार दौरा बन गया है। वह अपने परिवार के साथ अहमदाबाद से आगरा होते हुए नई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने जैसे शानदार स्वागत की अपेक्षा की थी उससे ज्यादा ही मेहमान नवाजी उन्हे भारत में मिली, खुद उन्होंने इसे इन शब्दों में बयां किया, जैसा स्वागत मैंने पाया वैसा किसी ने नहीं पाया। यहां तक अमेरिका में एक समारोह के दौरान जब 15 हजार लोग पहुंचे तो उन्होने कहा कि भारत में तो उनके स्वागत में 1 लाख लोग इकठे हुए थे।

भारत अमेरिका की दोस्ती का नया युग

वैसे पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया भर के नेताओं के साथ तालमेल बैठाने में सिद्धहस्त हैं। इसी वजह से ट्रंप के दिल को जीतना उनके लिये कोई बड़ी बात नही थी। जिसकी झलक इस दौरे में साफ देखने को भी मिली, वह ट्रंप के साथ व्यक्तिगत रिश्ता कायम करने में इसके बावजूद सफल रहे कि प्रारंभ में अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनके प्रति उपेक्षा भाव दिखाया था। बीते आठ महीनों में यह ट्रंप और मोदी के बीच पांचवीं मुलाकात थी। इससे यही पता चलता है कि दोनों के बीच रिश्ते कितने बेहतर हैं। इसके साथ साथ दोनों देशों के बीच हुए तीन समझौतों के चलते भारत अमेरिका और करीब आये हैं। खासकर रक्षा सौदा जो आने वाले दिनो में भारत को और मजबूत करेगा। इतना ही नही दोनो देश ऊर्जा क्षेत्र के साथ साथ बड़े व्यापार समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे।

तीन अरब डॉलर का रक्षा सौदा

तीन अरब डॉलर के रक्षा सौदे के तहत भारत एडवांस मिलिट्री इक्विपमेंट सिस्टम के साथ अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर अमेरिका से खरीदेगा। टंप ने दुनिया के सबसे आधुनिक अमेरिकी हथियारों जिसमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल, रॉकेट से लेकर नौसैनिक जहाज आदि को भारत को देने का भी एलान किया। जिससे भारत-प्रशांत क्षेत्र में और ज्यादा ताकतवर होकर उभरेगा। इतना ही नही इस इलाके में शक्ति के संतुलन के चलते अमन भी देखा जायेगा।

व्यापार समझौते को लेकर कोई बड़ा बयान नही, लेकिन एक दूसरे के हितों का रखा ध्यान

वैसे ट्रंप हर मंच से ये कहते हुए नजर आते है कि भारत अमेरिकी कंपनियो से ज्यादा पैसा टैक्स के रूप में लेता है जिससे व्यापार के सेक्टर में भारत से दोस्ती मुश्किल हो रही है, लेकिन ट्रंप ने खुद भारत प्रवास के दौरान अपनी इस बात का लेकर कहा कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी से जिस तरह से बात हुई है, उसका हल जल्द निकलेगा। यानी कि व्यापार के बीच कोई बड़ा समझौता तो नही हुआ है लेकिन ये तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनो में कोई ठोस कदम इसको लेकर भी निकलेगा।

बीते दशकों में एक के बाद एक सरकारों ने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है,लेकिन मोदी और ट्रंप ने रणनीतिक साझेदारी को धार देने के लिए वह किया है, जो पहले नहीं हुआ था। भारत-अमेरिका की सेनाओं के बीच साझा अभ्यास इसी का सुपरिणाम है। पहले इसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी। साफ है, कि मोदी ने ट्रंप को अमेरिका के दूसरे निकटतम सहयोगियों के मुकाबले काफी अच्छी तरह से साधा है।

हालाकि कुछ लोगों द्वारा यह कहे जाने का कोई मतलब नहीं है, कि ट्रंप की यात्रा भारत के लिए फायदेमंद नहीं रही। जो समझौते हुए हैं वे पहले से जगजाहिर थे। ऐसे उच्च स्तरीय दौरे हमेशा ऐसे ही होते हैं और उनमें वार्ता पहले से तय होती हैं। दरअसल ट्रंप की छवि एक बड़े कारोबारी नेता की रही है। वह कोई भी समझौता बहुत सोच समझकर करते हैं

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •