कहानी बदलाव की: जब कश्मीर के इस पहाड़ी गांव में आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली, बल्ब जले और आँसू टपक पड़े

आजादी के इतने साल बाद बिजली नहीं? यह सवाल बेहद अजीब लगता है सुनने में। लेकिन अब इसका जवाब है कि बिजली आ गई है। जो सुविधाएँ बड़ी आम हैं शहरों में वो कुछ सुदूर गांवों के लिए खास है। आप कल्पना करें कि आप ऐसे दूरदराज गांव में रहते हैं, जहां पर दशकों से बिजली नहीं आई है।

कश्मीर के जिला डोडा का पहाड़ी गांव गनौरी-टंटा के लोग पिछले दो दिनों से जश्न मना रहे हैं। उत्सव का कारण ब्याह-शादी नहीं बल्कि आजादी के बाद पहली बार बल्ब की रोशनी से जगमगा रहा उनका गांव व घर हैं।

करीब 55 साल पहले गांव में शादी कर आई फातिमा ने जब बिजली विभाग द्वारा उनके घर में सर्विस लाइन के साथ लगाए गए बल्ब का स्विच ऑन किया तो बल्ब की रोशनी को देख उनके चेहरे के भाव उनकी खुशी को जाहिर कर रहे थे। चेहरे पर मुस्कुराहट थी और आंखों में आंसू। उन्होंने कहा कि बल्ब की इस रोशनी के साथ ही दशकों से उनके जीवन में फैला अंधकार भी आज समाप्त हो गया। वहीं गांव के एक अन्य निवासी करीम दीन ने कहा कि अब उनके बच्चों का भविष्य भी बेहतर होगा। उन्हें अपने परिवारों से दूर रहकर पढ़ना नहीं पड़ेगा। बिजली पहुंच गई है तो अन्य सुविधाएं भी जल्द उन तक पहुंच जाएंगी। बिजली न होने की वजह से उन्हें ऐसा लगता था कि वह किसी अलग ही दुनिया में रहते हैं।

 

जिला डोडा के इस गांव में पिछले दो दिनों से जश्न का माहौल है। खुशी मना रहे गांव के बच्चे-बूढ़े इसके लिए बार-बार उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके कहने पर ही यह सब संभव हो पाया है। दरअसल एलजी मुलाकात कार्यक्रम के दौरान गांव के कुछ लोग उनसे मिलने गए थे। इस दौरान लोगों ने बताया कि उनके गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची हैं। उनका गांव ही नहीं उनके बच्चों का भविष्य भी अंधकार में है। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। उन्हें पढ़ाने के लिए उन्हें शहरों में भेजना पड़ता है। फोन चार्ज करने तक के लिए उन्हें पहाड़ों से नीचे मुख्य कस्बों में आना पड़ता है।

 

यह सब सुन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने डोडा जिला प्रशासन व जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड जेपीडीसीएल को एक माह का समय देते हुए निर्देश दिए कि इस समयावधि के भीतर गांव में बिजली पहुंच जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गनौरी-टंटा गांव की तरह अन्य कोई दूसरा गांव भी है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है तो वहां भी व्यवस्था की जाए।

 

उपराज्यपाल के निर्देश के बाद ही जिला प्रशासन व बिजली निगम ने अभियान शुरू कर दिया और 15 दिनों के रिकार्ड समय में गांव में बिजली पहुंचा दी। उीडीसी सदस्य डॉ. सागर डी डोईफोड ने बताया कि जिला प्रशासन व बिजली निगम के अधिकारियों का काम सराहनीय रहा। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद युद्ध स्तर पर काम जारी रखा गया। इसी का नतीजा है कि इतने कम समय में गांव तक बिजली पहुंचा दी गई।

 

डीसी डोडा डॉ सागर भी गांव के लोगों की इसी खुशी में शामिल होने के लिए उनके बीच पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों को इसके लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अभी बिजली पहुंची है। अब अन्य सुविधाएं भी उन तक इसी तरह रिकार्ड समय में पहुंचेगी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस बारे में विशेष तौर पर निर्देश दिए हैं।

मोदी सरकार आने के बाद ऐसी कहानियाँ आम हैं कि इतिहास के बाद बिजली/सड़क/पानी पहुंचा। यही नया भारत है जो विकास का ऐतिहास रच रहा है