दूसरी लहर में आर्थिक पैकेज घोषित करने के बाद सरकार का ऐलान, रोजगार के लिए 22 हजार करोड़ करेगी खर्च

कोरोना महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना की शुरुआत की थी। इसी योजना के तहत इस साल भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 जून को आर्थिक राहत पैकेज का ऐलान किया। अब आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना में 31 मार्च 2022 तक पंजीकरण कराया जा सकता है। पहले इसकी अंतिम तिथि 30 जून 2021 थी। इस योजना के तहत 15,000 रुपए से कम सैलरी वाले लोगों को और बेरोजगार लोगों को लाभ मिलता है। भारत रोजगार योजना के तीसरे फेज में 12 नई योजनाएं शुरू की गई है। इन योजनाओं से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा। सरकार इन योजनाओं में रिजर्व बैंक के साथ मिलकर 27.1 लाख करोड़ का निवेश कर रही है। यह राशि देश की जीडीपी की 13 फीसदी है।

 

71.8 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना

सरकार की इस पहल से औपचारिक क्षेत्र में 71.8 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है। वहीं इस योजना की अवधी बढ़ाने से अनुमानित खर्च बढ़कर 22,098 करोड़ रुपए हो गया है। एबीआरवाई के तहत ईपीएफओ में पंजीकृत प्रतिष्ठानों के ऐसे कर्मचारी, जिनकी सैलरी 15,000 रुपये से कम है, उन्हें लाभ होगा। इस योजना के तहत सरकार भी EPF में योगदान देती है। सरकार EPFO में कमर्चारी की सैलरी का 24 फीसदी या फिर 12 फीसदी हिस्सा देती है। सरकार 2 साल तक यह योगदान देती है। आपके संस्थान में सरकार कितना योगदान देगी यह कर्मचारियों की संख्या पर निर्भर करता है।

21 लाख कर्मचारियों को हो चुका है सीधा फायदा

18 जून 2021 तक एबीआरवाई के तहत 79,557 प्रतिष्ठानों के 21.42 लाख कर्मचारियों को लाभ हुआ है। इसके लिए सरकार ने 902 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सरकार का लक्ष्य लाभार्थियों की संख्या 50 लाख तक पहुंचाना है। इसके लिए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के तीसरे अभियान की शुरुआत की है जिसका फायदा देश में देखा जा रहा है।

सरकार एक तरफ कोरोना से निपटने के लिये वैक्सीनेशन को तेज कर रही है तो इस दौर में जिन लोगों की नौकरी पर बन आई थी उनके लिये भी योजना के तहत मदद पहुंचाने में लगी है। यानी सरकार स्वास्थ्य सेक्टर को तो बेहतर बना ही रही है साथ में आर्थिक मोर्चे पर रोजगार मोहईया करके तेजी से विकास को आगे बढ़ाना चाहती है।