आखिर शहीदों के स्थल जलियांवाला बाग पर सियासत क्यों ?

लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनो ही जनता की आवाज होती है और दोनो के स्वर से देश और समाज का विकास होता है। लेकिन पिछले कई सालों से ये देखा जा रहा है कि विपक्ष ने अपना काम ही सरकार का विरोध करना समझ लिया है तभी तो कोई भी काम सरकार करती है तो उसका विरोध विपक्ष ने अपना अधिकार समझ लिया है। अब जलियांवाला बाग के नवीनीकरण का काम को ही ले लीजिये। आज शहीदों के इस स्थल को नया कलेवर जो मिला है इससे सभी देशवासी खुश है लेकिन इसपर भी कुछ लोग विरोध करके कही ना कही सियासत में अपनी छवि सिर्फ विरोध करने की बना रहे है जो लोकतंत्र के लिये एक खतरा है।

Glimpses from the renovated Jallianwala Bagh Smarak

शहीदो के सम्मान को लेकर भी ओछी सियासत

पिछले 7 सालों से देखा जाये तो उन आजादी के परवानों को देश जान रहा है पहचान रहा है जिनकी कुर्बानी से देश को आजादी मिली है। ये वो नाम है जो बरसो से कुछ दरबारी इतिहासकारों के चलते सालों से किताबों के पन्नो में या तो गायब हो गये थे या फिर काफी पीछे हो गये थे लेकिन अब उन्हे उचित स्थान दिया जा रहा है तो उनके स्मारको को सजाया जा रहा है। इसकी शुरूआत नेताजी के म्यूजियम से लेकर जलियांवाला बाग तक पहुंच चुका है जहां देश की आने वाली नस्ल उन लोगों से रूबरू हो रही है। बस लगता है कि इसी बात से कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। वो नहीं चाहते कि उनके परिवार को छोड़कर आजादी की लड़ाई की असल कहानी बताई जाये तभी खुद के राज्य में उन्होने भारत के भावी इतिहास को कबाड़ में तब्दील कर दिया था और जब मोदी सरकार उसमे फिर से जान फूँक रही है तो वो सरकार के काम पर नुकता चीनी  करने में लगे है जबकि खुद उनके साथी भी उनकी इस हरकत में उनके साथ नहीं खड़े हो रहे है और उनके गाल में करारा तमाचा ही लगा रहे है ये कहते हुए कि मोदी सरकार बिलकुल ठीक कर रही है।

विरोध के चलते अपनी छवि खराब करता विपक्ष

वैसे जिस तरह से संसद में विपक्ष ने अपना रूप दिखाया या फिर पिछले कई मुद्दो पर देश में माहौल खराब करने में उनका हाथ सामने आया है उससे तो यही लगता है कि विपक्ष सियासत में विपक्ष की परिभाषा भूल गया है जो लोकतंत्र के लिये एक गलत पहल होगी। क्योकि अगर लोकतंत्र को मजबूत करना है तो तर्को के आधार पर विरोध करना चाहिये जैसे एक वक्त अटल बिहारी, सुषमा स्वराज और चौधरी चरण सिंह या फिर लोहिया जी जो सत्तापक्ष को घेरते थे। लेकिन इस वक्त तो लगता ये है कि बस मोदी ने योजना लागू की है इसलिये गलत है जबकि जनता उसी योजना को हाथोहाथ लेती है और मोदी जी के साथ खड़ी रहती है।

इस तरह का माहौल देश के लिये बिलकुल ठीक नही है क्योकि इससे नुकसान सिर्फ देश का होगा विकास की स्पीड मंद पडेगी। इसलिये विपक्ष को अपनी सोच बदलकर तर्क रहित विरोध करना चाहिये जिससे देश में एक स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना हो सके।