आखिर क्यों 3 बड़े बैंकों का विलय कर रही है मोदी सरकार? ग्राहकों की बल्ले- बल्ले या निकलेंगे आंसू?

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देश की आर्थिक हालत को ठीक करने के लिये मोदी सरकार लगातार कई बड़े कदम उठा रही है और इसका रंग भी दिखने लगा हैI इसी क्रम में भारत की 3 बड़ी बैंको-बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का मिलान करने की घोषणा कर दी गई है. कयास लगाया जा रहा है कि विलय के बाद जो नया बैक बनेगा वो नये वित्तय वर्ष यानी 1 अप्रैल से काम भी करना शुरू कर देगा।जिसके बाद उपभोक्ता को कई फायदे हो सकते है और बैक का एनपीए भी कम हो सकता है।

 

उपभोक्ताओं को मिलेगी बेहतर सेवाएं

जैसा कि सब जानते है कि विजया बैंक की पकड़ दक्षिण भारत मे काफी ज्यादा है वही बैंक ऑफ बड़ौदा और देना बैंक उत्तर और पश्चिम मे काफी सफल बैंक हैI ऐसे में इन बैंको के मर्जर के बाद इनका नेटवर्क काफी अच्छा हो जायेगा तो एटीएम की सर्विस भी बेहतर होगी। वही लोगो को बैंक लोन देने मे भी आसानी होगी।

विदेशों में भी बैंकिंग होगी आसान

बैंक ऑफ बड़ौदा की बात करे तो कई देशों मे इस बैंक की शाखा है।ऐसे में बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय के बाद विजया बैंक और देना बैंक के ग्राहकों को भी बैंक ऑफ बड़ौदा के इस विदेशी नेटवर्क का लाभ मिल सकेगा। वहीं देश में विजय बैंक और देना बैंक के नेटवर्क का लाभ बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों को मिलेगा। विलय के बाद नए बैंक के पास देश-विदेश में कुल 9,485 शाखाएं हो जाएंगी।

बैंक अपने उपभोक्ताओं को दे सकती है लुभावनी योजनाएं

स्टेट बैक और पीएनबी बैंक के बाद तीनों बैंकों के मर्जर के बाद बनने वाला बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। ऐसे में इस बैंक का फंड काफी अधिक होगा वहीं पूंजी की लागत में भी कमी आएगी।  ऐसे में ये बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए आकर्षक योजनाएं लाएगा. यह भी संभव है कि इस नए बैंक के ग्राहकों को शाखाओं में जाने पर बेहतरनी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं. सरकार का भी मानना है कि इस विलय से बैंक के ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी, बाजार में इस बैंक के लिए ग्राहकों के बीच पहुंच पाना आसान हो जाएगा और संचालन के तरीकों में बेहतरी आएगी. इससे बैंक के कर्मियों को भी लाभ मिलेगा।

मोदी सरकार में चौथी पुनर्गठन प्रक्रिया

मोदी सरकार में वितीय क्षेत्र में यह चौथा वित्तीय पुनर्गठन  है. इससे पहले सरकार ने तीन साधारण बीमा कंपनी के विलय और एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में अधिकांश हिस्सेदारी की अनुमति प्रदान की थी. एसबीआई के साथ उसके सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का भी विलय किया गया था।

इसके साथ साथ तीनो बैंक के कर्मचारियों की सख्या भी काफी अधिक बढ़ जायेगी। जिससे बैंकों मे काम करने वालो की कमी भी दूर की जायेगी और ग्राहको को बैंक ज्यादा सहूलियत दे सकेगा। इस कदम के बाद बनने वाले ये नया बैंक स्टेट बैक के साथ साथ पीएनबी बैंक को भी कड़ी टक्कर देगा। ऐसे मे बाजार मे बैंकों के बीच प्रतिश्पर्धा बढ़ेगी जिससे ग्राहको का ही फायदा होगा। वही बैंक की माली हालत भी बेहतर हो सकती है। ऐसे मे सरकार के द्वारा उठाया गया ये कदम आने वाले दिनो मे अच्छा साबित हो सकता है। खासकर देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ।


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