आखिर विदेशी मीडिया को भारत से इतनी खुन्नस क्यों ?

कोरोना को हराने के लिये भारत रात दिन लगा है इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है। हां ये जरूर है कि पहली लहर से दूसरी लहर कोरोना की ज्यादा गंभीर थी। पर इसके पीछे कुछ राज्यों की कोताही सबसे बड़ी वजह थी और ये जग जाहिर भी हो चुका है। लेकिन पता नही विदेशी मीडिया को मोदी जी से क्या खुन्नस थी कि किसी दूसरे का दोष उनपर लगाकर लगातार उनकी बुराई जग में करते दिखे।

कोरोना पर पश्चिमी मीडिया की असलियत सामने आई

संक्रमित मरीजों और होने वाली मौतों को लेकर पश्चिमी मीडिया ने जिस तरह हाय-तौबा मचाई की विश्व में ये लगने लगा कि भारत की हालात सबसे ज्यादा खराब है कोरोना के चलते भारत बर्बाद हो जायेगा। लेकिन हकीकत ये सामने आई कि ज्यादातर विदेशी मीडिया ने दुनिया के सामने झूठ ही फैलाया झूठ फैलाने में सबसे पहला नाम बीबीसी का आता है जिसने पिछले 14 महीनो में सुर्खियां बटोरने के लिए 176 फेक न्यूज दिखाई। इसी तरह ब्रिटेन का ही अखबार गार्जियन ने 96 फीसदी वो खबर छापी जिनका कोई तथ्य तक नहीं था। इसी तरह अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स की बात करें तो दोनों के ही 88 फीसद न्यूज दुर्भावनापूर्ण दिखाई। जबकि अपने यहां फैले कोरोना को लेकर इनकी खबर बिलकुल उल्टी थी। हालांकि पश्चिमी मीडिया प्रति दस लाख जनसंख्या पर ना तो कोरोना मरीजों की बात करता है और ना ही मृतकों का सही आंकड़ा बताता है। क्योंकि अगर इन आंकड़ों की बात करें तो भारत की स्थिति पश्चिमी देशों के मुकाबले बहुत बेहतर है लेकिन इसके बाद भी विदेशी मीडिया गलत खबर फैलाकर मोदी जी की छवि खराब करता रहा और जब अब उसकी पोल खुल रही है तो वो शांत है।

भारत की छवि क्यो किया खराब 

जिस तरह से भारत ने कोरोना की पहली लहर में काम करके दिखाया था वो विदेशी मुल्क को पच नहीं रहा था। नया भारत ने वैक्सीन भी इस दौर में बना ली और आत्मनिर्भर भारत के जरिये अपनी कारोबारी हालात को भी संभाल लिया ये उन्हे गले नहीं उतर रहा था। विश्व में भारत की हो रही वाहवाही को उन्हे बस खराब करना था और उन्हे दूसरा मौका कोरोना की दूसरी लहर में मिल गया। फिर क्या था विश्व के सामने भारत की ऐसी छवि पेश की गई जैसे भारत बहुत असहाय है। फिर क्या था सरकार की नीतियों के खिलाफ कुछ वामपंथी और मोदी विरोधी सोच ने काम करना शुरू कर दिया जो पूरी तरह से झूठ था आज भी वो लोग और कुछ देश के लोग मिलकर भ्रम फैलाने में जुटे है लेकिन कहते है ना कि सच छुपता नहीं और वही हुआ भारत विरोधी हर वो सोच आज परास्त हुई।

वैसे विदेशी मीडिया की बात करे तो भारत को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्टिग में बहुत रुचि नहीं रखता है। उसकी कोशिश भारत सरकार के विरुद्ध एक विमर्श स्थापित करने की होती है। यही वजह है कि हमारे देश को लेकर वे लोग जो खबरें प्रकाशित करते हैं, उसमें से सिर्फ 22 फीसद समाचार ही तटस्थ रिपोर्टिग पर आधारित होते हैं। वैसे ऐसे में बोला जा सकता है कि अगर मन में विरोध करने की भावना के साथ ही खबर की जाये तो सबकुछ खराब ही दिखेगा जो विदेशी मीडिया ने किया।