आखिर किसान आंदोलन का कैप्टन कौन ?

एक बार फिर कृषि बिल के विरोध का जिन्न पंजाब से निकलकर दिल्ली की सीमा के पास पहुंच गया है लेकिन इस आंदोलन को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर क्यो विरोध प्रदर्शन हो रहा है। ऐसे में लग यही रहा है कि क्या केंद्र सरकार की ओर से पारित कृषि कानून के विरोध के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंदिता है?  इस सवाल का अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका है। लेकिन पंजाब के किसानों की आड़ में खालिस्तान समर्थको का सड़कों पर आना बता रहा है कि इस आंदोलन में किसान सिर्फ मोहरा बन रहे है।

भिंडरवाले के पोस्टर के साथ प्रदर्शन

जिस तरह से कृषि बिल के खिलाफ पंजाब में आंदोलन चल रहा है उसे देखकर तो पीएम मोदी का बोला गया बयान याद आ रहा है जिसमेजिसमें उन्होने CAA आंदोलन के दौरान साफ बोला था कि ये प्रदर्शन संयोग नही एक प्रयोग है। मोदी सरकार के विरोध में या देश में बने अमन को बिगाड़ने के लिये। कुछ ऐसा ही कृषि बिल के खिलाफ पंजाब में दिख रहा है जिसमे साफ तौर पर खालिस्तान की मांग करने वाले आतंकी भिंडरवाले के पोस्टर दिख रहे है। पीएम मोदी को लेकर गलत बयान बाजी की जा रही है। इससे मजे कि बात ये है कि इसके बावजूद भी कुछ लोग ऐसे लोगो के साथ खड़े दिख रहे है जो देश को तोड़ने की बात लगातार करते आये है। दूसरी तरफ बता दें कि देश में एक बार फिर बढ़ते कोरोना संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यों के लिए नई कोरोना  गाइडलाइंस तय की। इस गाइडलाइंस में भीड़भाड़ पर रोक लगाने, स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने और नियम तोड़ने वालों पर सख्ती करने के निर्देश हैं। लेकिन गुरुवार को देश के चार राज्यों में जिस तरह किसान सड़कों पर उतरे, उससे गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ती दिखाई दी। इसके साथ देश के बाकी राज्यों में किसान इस बिल को लेकर उग्र नही तो केवल पंजाब में ही ऐसा क्या हो रहा है। जो किसान इस बिल पर इतना आपा खो रहे है। इन सब बातो से तो यही लगता है कि कही न कही इस आंदोलन के पीछे दिमाग किसी और का है।

क्या राजनीतिक दल उपलब्ध करवा रहे हैं रसद सामग्री?

सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई किसान इतने मजबूर हो गए हैं कि उनके पास प्रदर्शन के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। किसान प्रदर्शनों में शामिल लोग बड़ी संख्या में रसद सामग्री और ओढने-पहनने का इंतजाम करके दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। आरोप हैं कि इसके लिए प्रदर्शनकारी किसानों को पीछे से राजनीतिक दलों की ओर से पूरी मदद मुहैया करवाई जा रही है। ऐसे सवाल उठ रहा है कि  सरकार पर गुस्सा उतारने वालों में सचमुच सभी किसान ही हैं या फिर राजनीति में रमे-रमाए लोग, जो किसान का चोला पहनकर सडक पर निकले हैं। फिलहाल सरकार प्रदर्शनकारियों से शांति से बात करने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस आंदोलन से दिल्ली-एनसीआर के साथ ही हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू से आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कत हो रही है। जबकि इससे पहले भी किसान कई आंदोलन कर चुके है लेकिन वो आम लोगो को नुकसान नही पहुंचाते आये है। ऐसे में इस आंदोलन से कही न कही सियासत की बू जरूर आ रही है।

वैसे पिछले 6 साल से जनता का विश्वास मोदी सरकार में लगातार बढ़ा है और उसकी वजह भी है मोदी सरकार का देशहित के लिये सख्त और जल्द फैसले लेने जिससे उन लोगों की परेशानी बढ़ रही है जो सत्ता में सिर्फ मजे लेने के लिये आते थे और उन मुद्दो को सिर्फ मुद्दे ही बनाये रखते थे जिससे जनता उलझी रहे और उन्हे वोट देती रहे। जबकि मोदी सरकार ने आते ही इस पर ब्रेक लगा दिया।