आखिर किसने दी, विनायक दामोदर सावरकर को ‘वीर’ की उपाधि ?

आजादी की जंग में यूं तो अपना सबकुछ राष्ट्र को समर्पित करने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। लेकिन चंद लोगों को ही देश की आजादी का नायक इतिहास में बताया जाता आया है जो एक तरह से आजादी के कालखंड के इतिहास के साथ छेड़छाड़ ही है। जिसे हम आज एक दुर्भाग्य के रूप में ही देख सकते हैं। लेकिन इन सब के बीच भी कुछ ऐसे आजादी के मतवाले थे जिनके इतिहास को कुछ लोगों ने कुचलने की कोशिश तो खूब की लेकिन उनका सच इतना भारी निकला की वो उसे दबा नही पाये इन जियालों में से एक थे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारियों में से एक विद्वान, अधिवक्ता और लेखक विनायक दामोदर सावरकर ऐसी क्रांतीकारी जिनके नाम के आगे वीर की उपाधि जोड़ी गई है। आखिर ये उपाधि उनको किसने दी उनके नाम के आगे वीर क्यों लगा? चलिये आज इससे हम पर्दा उठाते हैं।

कैसे मिली वीर की उपाधि?

सावरकर के ‘वीर’ उपाधि से जुड़ी एक कहानी है। इस कहानी में कई दिलचस्प रहस्य भी है, दरअसल जिस कलाकार ने सावरकर को ‘वीर’ की उपाधि दी, उस कलाकार को सावरकर भी ‘आचार्य’ कहकर बुलाते थे, दोनों के नामों के उपाधि इस तरह से लोकप्रिय हुई कि लोग उनकी उपाधि के बगैर नाम ही नहीं लेते। एक वक्त ऐसा आया जब देश में कुछ लोग सावरकर जी के धुर विरोधी हो गये और उनका हर जगह से विरोध मुखर हो गया। ऐसे महौल में उस वक्त में नाटक और फिल्म कलाकार पीके अत्रे ने सावरकर का साथ देने का फैसला किया। अत्रे ने पुणे में अपने बालमोहन थिएटर में सावरकर के लिए एक स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का खुलेतौर पर कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन इसके बाद भी हजारों लोग कार्यक्रम में जुटे और सावरकर का स्वागत कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में ही अत्रे ने सावरकर को ‘वीर’ की उपाधि दी, जो आज तक चर्चित है और जीवन भर उनके साथ जुड़कर रह गई।

निडरता था वीर सावरकर का सबसे बड़ा हथियार

वीर सावरकर ऐसे ही नही इन्हें ये उपाधि मिली थी सावरक आजादी के वो पहले नायक थे जिन्होंने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए भारतीय वीरों के संघर्ष को देश की आजादी की पहली लड़ाई कहने की हिम्मत की थी उन्होने ही देश को बताया था कि भारत अब गुलामी ज्यादा दिन तक नही सहन कर सकता है। अंखड भारत और पूर्ण आजादी का नारा उन्होंने ही सबसे पहले बुलंद किया था जिसके चलते उन्हे कालापानी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन निडर वीर सावरकर ने इस पर भी हार नही मानी और लगातार वो देश हित में काम करते रहे।

वीर सावरकर वो नाम है जो युगों से देश के अनगिनत युवाओं को आज भी देशहित में काम करने की प्रेरणा दे रहे हैं। ऐसे महान व्यक्ति वीर सावरकर को देश आज नमन करता है और जो इमानदारी राष्ट्रभक्ति उन्होंने हम सबको सिखाई है उसी राह पर चल कर नये भारत को बनाने के लिये आगे हम देश के युवा बढ़ते जाएंगे।