सैलानियों के लिए अच्छी खबर: 2 महीने बाद खुला कश्मीर, जन्नत में फिर से कर सकेंगे सैर-सपाटा

अगर आप कश्मीर की वादियों में घूमने जाने की सोच रहे हैं तो आपके लिए राहत की खबर है। कश्मीर के तेजी से बदलते हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने से पहले पर्यटकों को कश्मीर घाटी छोड़ने की एडवाइजरी वापस ले ली है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य के हालात तथा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के दौरान एडवाइजरी वापस लेने की हिदायत दी। राज्यपाल के इस फैसले से कश्मीर घाटी 69 दिन बाद फिर से सैलानियों के लिए खुल गई है।

jammu-kashmir tourists ban lift after two months

अनुच्छेद 370 हटाने से पहले 2 अगस्त को जारी एडवाइजरी में आतंकी खतरा बताकर अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी छोड़ने को कहा गया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नयी एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है की सभी पर्यटकों को सभी जरूरी सहायता मुहैया करवाई जाएगी।

गौरतलब है की घाटी में आतंकवाद के तीन दशक में पहले कभी पर्यटकों के आने पर रोक नहीं लगी थी। जुलाई में यहाँ 1.70 लाख सैलानी आये थे, लेकिन सैलानियों के संख्या में कमी के साथ ही कश्मीर में होटल मालिकों ने अपने ऑपरेशन बंद कर दिए थे, अब सरकार के इस फैसले के बाद से उनके व्यवसाय में फिर से रौनक आएगी।

पर्यटकों के लिए एडवाइजरी हटने की घोषणा से कश्मीर में मरनासन्न नजर आ रहे पर्यटन उद्योग में नया जोश आ गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन जगत की बड़ी अहमियत है। होटल मालिक, टैक्सी चालक, दस्तकारी का सामान बेचने वाले, शिकारा वाले सभी उत्साहित हैं। हालांकि, उनके मन में अभी भी कई आशंकाएं हैं, लेकिन वह कह रहे हैं कि बीते दो माह के दौरान जिस तरह से कश्मीर में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियां ठप हैं अगर वह आगे भी बंद रहती हैं तो वे दो माह के नुकसान को नवंबर-दिसंबर में पूरा कर अगले साल की भी तैयारी कर लेंगे।

पर्यटन जगत में राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान करता है। यह पूरे राज्य में तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। इनमें एक लाख लोग सिर्फ कश्मीर में ही हैं। आर्थिक मामलो के विशेषज्ञ कहे जाने वाले मसूद हुसैन के मुताबिक, कश्मीर में कृषि के बाद सिर्फ टूरिज्म ही एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें छह से सात लाख लोग प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रोजगार प्राप्त करते हैं। पूरे राज्य में 12 से 15 लाख लोगों को पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं।

वादी में पर्यटन को फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र ने खुद मोर्चा संभाला है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की आमद को बढ़ाने के लिए देश-विदेश में बैक टू वैली कार्यक्रम चलाने का फैसला किया है।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मलिक ने समीक्षा बैठक में बीडीसी चुनाव की तैयारियों पर भी विस्तृत चर्चा किया। इसमें यह बात निकल कर सामने आई कि लोगों को इस चुनाव में बेहद दिलचस्पी है और बीडीसी अध्यक्ष पद की ज्यादातर सीटें भरी जाएंगी। चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो, इसके लिए एआरओ और एईआरओ को मोबाइल फोन दिए गए हैं। सोमवार को भी बीडीसी उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र भरे। प्रशासन ने 24 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर में पहली चुनावी प्रक्रिया के तहत 24 अक्टूबर को ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल चुनाव(बीडीसी) कराने का भी फैसला किया है। हालांकि, कांग्रेस ने राजनीतिक नेताओं की निरंतर नजरबंदी का हवाला देते हुए इन चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है।